बचपन

न डरना शेर की दहाड़ से और बकरी
के मिमियाने से डर जाना. गिर पड़ना
आंगन में ठुमकते हुए, हौसला रखना
फिर भी एवरेस्ट के शिखरों पर फतह की.

न समझ पाना छोटी-छोटी बातें और
बेझिझक सुझाना बेहद मुश्किल मसलों
के हल. सूखे हुए पौधों वाले गमलों
में डालना पानी, नोच लेना नए बौर.

रूठ जाना बेबात और फिर न मानना
किसी के मनाने से. खुश हो जाना

ऐसे ही किसी भी बात से. डूब जाना
किसी भी सोच में, वैसे बिल्कुल न समझना

दादी किसकी चिन्ता करती हैं बेकार,
दादा क्या सोचते रहते हैं लगातार?

इष्ट देव सांकृत्यायन






Comments

Post a Comment

सुस्वागतम!!

Popular posts from this blog

रामेश्वरम में

इति सिद्धम

पेड न्यूज क्या है?

Most Read Posts

रामेश्वरम में

Bhairo Baba :Azamgarh ke

Maihar Yatra

Azamgarh : History, Culture and People

...ये भी कोई तरीका है!

इति सिद्धम

सीन बाई सीन देखिये फिल्म राब्स ..बिना पर्दे का

आइए, हम हिंदीजन तमिल सीखें

विदेशी विद्वानों के संस्कृत प्रेम की गहन पड़ताल

पेड न्यूज क्या है?