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Showing posts from January, 2020

मेरी चीन यात्रा - 8

यह यात्रावृत्त शुरू से पढ़ने के लिए कृपया चटका लगाएं: पहली , दूसरी , तीसरी , चौथी , पांचवीं , छठी एवं सातवीं कड़ी  डॉ. अरविंद मिश्र   एक घंटे के उद्घाटन समारोह के पश्चात मुख्य हाल में ही कई विषयों पर विचारोत्तेजक विमर्श था। बीच में लंच भी था। चायनीज अपने दैनिक कार्यकलापों में नाश्ता लंच डिनर जल्दी करते हैं। साढ़े छह बजे नाश्ता , 12 बजे लंच और शाम को जल्दी ही छह बजे से डिनर शु रू । हमें कूपन भी इसी तरह मिले थे। एक बड़े से आयोजन परिसर में मुख्य कार्यक्रम हाल , प्रदर्शनी हाल , समाना ंत र सत्रों के कक्ष और भोजन का हाल भी था जो लगभग दस मिनट की चहलकदमी पर था। पूरे परिसर में कई खानपान और स्मृति चिह्नों की सजी - धजी दुकाने ं भी थीं जिससे खूब चहल - पहल रहती थी। आयोजकों की ओर से प्रतिभागी स्वतंत्र थे , चाहे वे चर्चा परिचर्चा या विमर्श से ज्ञानार्जन करें या घूमे फिरें। मेरा , डॉ . नरहरि और डॉ . सामी का किसी पैनेल में नाम नहीं था और कहीं बोलने का भी अवसर नहीं घोषित था । इसलि ए हम भी बिल्कुल मुक्त महसूस कर रहे थे कि ंतु यह तनिक क्षोभजनक तो था ही कि क्या हमें केवल मूक दर्शक के त

मेरी चीन यात्रा - 7

यह यात्रावृत्तांत शुरू से पढ़ने के लिए कृपया यहाँ चटका लगाएं: पहली , दूसरी , तीसरी , चौथी , पांचवीं एवं छठी किस्त डॉ. अरविंद मिश्र  आज विज्ञान कथा सम्मेलन के आगाज का दिन 22 नवंबर ( 2019) था । पहले ही इत्तिला मिल चुकी थी कि ठीक आठ बजे हमें होटेल लाबी में नीचे पहुंच जाना है , जहां से बसें कार्यक्रम स्थल को प्रस्थान करेंगी। उसके पहले होटेल का काम्प्लिमेंटरी नाश्ता भी करना था। सितारा होटलों के काम्प्लिमेंटरी नाश्ते को लेकर बड़ी सुगबुगाहट रहती है। यह बहुत कुछ ब्रंच का भी काम करता है और अगर दोपहर का खाना न भी मिले तो काम चल जाता है। भारत के समय के मुताबिक हम यहां ढाई घंटे एडवांस चल रहे थे और हमारी जैवीय घड़ियां तेजी से स्थानीय समय के अनुसार तालमेल बिठा रहीं थीं । जल्दी से दैनंदिन क्रियाकर्म और स्नान ध्यान निपटा हम पांचवे ं तल के भव्य डाइनिंग हाल में साढ़े सात तक पहुंच ग ए । भारत में सुबह पांच बजा था। पत्नी को फोन किया और बताया कि यहां तो नाश्ता शुरू हो गया तो उन्हें आश्चर्य हुआ - इतनी जल्दी ? नाश्ते में सामिष व्यंजनों का ढ़ेर था। भूरे सफेद अंडे। बत्तख और खरगोश के गोश्त के

मेरी चीन यात्रा – 6

यह यात्रा वृत्तांत शुरू से पढ़ने के लिए कृपया यहाँ चटका लगाएं : पहली , दूसरी , तीसरी , चौथी एवं पांचवीं किस्त   डॉ. अरविंद मिश्र   रा इ जिंग बटरफ्लाई होटेल में हमारा ठहराव था। जहां स्वागत डेस्क पर वालंटियर्स , जिसमें स्कूलों की छात्र छात्राएं थीं , आगंतुकों की सहायता में जुटे थे। आगंतुक अतिथियों को होटेल रिसेप्शन पर ले जाना , इ ंट्री , सामान कमरे में भिजवाना आदि काम सभी मुस्तैदी से निपटा रहे थे। इन्हें अंग्रेजी की कामचलाऊ जानकारी थी। जिससे वे सभी बतौर दुभाषिए काम कर रहे थे। होटेल रिसेप्शन की बालाएं तो अंग्रेजी बिल्कुल भी नहीं समझ रही थीं। हमें पांच सौ युवान (रु. पांच हजार लगभग) सि क्योरिटी मनी के रुप में जमा करने को कहा गया। यह अजब सा लगा क्योंकि हमारा पूरा पैकेज ही पेड था। मगर बताया गया कि वापसी में यह राशि लौटा दी जा ए गी। होटेल राइजिंग बटरफ्लाई किसी भी भारतीय होटेल की तुलना में हर लिहाज से आरामदायक और भव्य था। इसके लि ए हम सात सितारा दे सकते थे। तकनीकी तामझाम भी खूब था। एक रोबोट भी अढ़वा-टिकोर ( Errand) में लगा था और फर्श की सफाई के साथ छोटे - मोटे सामान भी ऊप

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