मेरी चीन यात्रा - 9
यात्रावृत्त शुरू से पढ़ने के लिए कृपया यहाँ चटका लगाएँ: पहली , दूसरी , तीसरी , चौथी , पांचवीं , छठी , सातवीं एवं आठवीं कड़ी डॉ. अरविंद मिश्र सम्मेलन के पहले दिन आयोजन स्थल से जल्दी लौटकर होटेल के पास ही थोड़ा घूमा फिरा। विविध फलों की सजी - संवरी दुकाने ं आकर्षित कर रही थीं। जनरल स्टोर और ड्रेसेज की ढ़ेर सारी दुकाने ं थीं और खानपान की भी। चीन में सिगरेट धुआंधार पी जाती है। होटेल में भीतर तो मनाही है मगर सार्वजनिक स्थलों पर जिसे देखो सिगरेट पीता दिख रहा था। सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान निषेध का यहाँ भारत जैसा प्रतिबंध नहीं है। इतना सिगरेट चीनी क्यों पीते हैं , समझ में नहीं आया। सड़कों को साफ सुथरा रखने के लिए हमेशा उनकी यांत्रिक तरीके से सफाई होती दिखी। फलों की एक दुकान से मैंने एक बड़े बेर की आकार के फल खरीदे - नाम था ज़ाओज़ी या जुजुबे। बेहद मीठा। वापसी में एकाध किलो घर ले जाने की सोची मगर लोगों ने कस्टम निगरानी से डराया। यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि ताजे फल चीन से बाहर ले जाने की अनुमति है या नहीं। एक प्रतिभागी ने कहा कि वापसी में आपके कस्टम पर भी...