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रामेश्वरम में

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हरिशंकर राढ़ी दोपहर बाद का समय हमने घूमने के लिए सुरक्षित रखा था और समयानुसार ऑटोरिक्शा  से भ्रमण शुरू  भी कर दिया। पिछले वृत्तांत में गंधमादन तक का वर्णन मैंने कर भी दिया था। गंधमादन के बाद रामेश्वरम द्वीप पर जो कुछ खास दर्शनीय  है उसमें लक्ष्मण तीर्थ और सीताकुंड प्रमुख हैं। सौन्दर्य या भव्यता की दृष्टि  से इसमें कुछ खास नहीं है। इनका पौराणिक महत्त्व अवश्य  है । कहा जाता है कि रावण का वध करने के पश्चात्  जब श्रीराम अयोध्या वापस लौट रहे थे तो उन्होंने सीता जी को रामेश्वर  ज्योतिर्लिंग के दर्शन  के लिए, सेतु को दिखाने के लिए और अपने आराध्य भगवान शिव  के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए पुष्पक  विमान को इस द्वीप पर उतारा था और भगवान शिव की पूजा की थी। यहाँ पर श्रीराम,सीताजी और लक्ष्मणजी ने पूजा के लिए विशेष  कुंड बनाए और उसके जल से अभिषेक  किया । इन्हीं कुंडों का नाम रामतीर्थ, सीताकुंड और लक्ष्मण तीर्थ है । हाँ,  यहाँ सफाई  और व्यवस्था नहीं मिलती और यह देखकर दुख अवश्य  होता है। स्थानीय दर्शनों  में हनुमा...

रामेश्वरम : बेहद अपने लगने लगे राम

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हरिशंकर राढ़ी कोडाईकैनाल से अपराह्नन चली हुई हमारी बस करीब साढ़े सात बजे मदुराई बस स्टैण्ड पर पहुँची तो झमाझम बारिश हो रही थी। बस से उतरे तो पता चला कि मित्र की जेब से बटुआ किसी ने मार लिया था। यह घटना हमारे लिए अप्रत्याशित थी। क्योंकि हमें विश्वास था कि दक्षिण भारत में ऐसा नहीं होता होगा। वैसे मुझे यह भी मालूम था कि मित्र महोदय बड़े लापरवाह हैं और उनकी अपनी गलती से भी बटुआ गिर सकता है। ऐसा एक बार पहले भी हुआ था , जब हम त्रिवेन्द्रम से मदुराई जा रहे थे। उस समय उनका बटुआ , जो पैंट की पिछली जेब में था और अधिकांश लोग ऐसे ही रखते हैं , गिरते - गिरते बचा था। मेरी पत्नी ने देख कर आगाह कर दिया था। बटुए में पैसा तो अधिक नहीं था किन्तु उनका परिचय पत्र , ड्राइविंग लाइसेन्स और एटीएम कार्ड था। हम सभी का परेशान होना तो स्वाभाविक था ही। तलाश प्रारम्भ हुई और अन्ततः निराशा पर समाप्त हुई। किन्तु पता नहीं क्यों मुझे बार - बार ऐसा लग रहा था क...

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