व्यवस्था में कालनेमि
इष्ट देव सांकृत्यायन ¶ निर्भया के दोषियों को फांसी होने से क्या बलात्कार रुक जाएंगे ?¶ ¶ यह प्रश्न आज वही उठा रहे हैं जो खुद को गलती से किसी की कुहनी लग जाने पर उसकी जान ले लेना चाहते हैं. ¶ तब कहां चली जाती है सारी सहिष्णुता तुम्हारी ? क्यों नहीं सुझती तुम्हें तब अहिंसा ? ¶ ये वही लोग हैं जो अपना पर्स चोरी हो जाने पर पूरे सिस्टम , पूरे देश और देश की सारी जनता को कोसने लगते हैं. गोया सब केवल इनका पर्स चुराने में जुटे पड़े थे. ¶ लेकिन सवाल यह है कि जब दोषी को सजा देनी ही नहीं , बलात्कार जैसा जघन्य अपराध करने वाले को एक मदरसे के फर्जी दस्तावेज के आधार पर नाबालिग मान लिया जाना है और उसे इस महान कृत्य के लिए पुरस्कार दिया जाना है , तो फिर जरूरत क्या है दुनिया में किसी सिस्टम की ? क्यों न चलने दिया जाए जंगल राज ? ¶ और बताएं आपको , दुनिया में कोई सिस्टम नहीं होना चाहिए , यह भी एक सिद्धांत है और इस सिद्धांत के आज के दुनिया में सबसे बड़े प्रतिपादकों वही हैं , जिनके अपने सिस्टम ने थ्येना आन मन चौक पर एक ही झटके में लाखों युवाओं को टैंक लगाकर उड़ा दिया था. उनका अप...