Posts

Showing posts from January, 2014

शिरडी की ओर

Image
हरिशंकर राढ़ी  पंचवटी की परिक्रमा कर चुकने के बाद हमारा अगला पड़ाव साईं का शिरडी धाम था। पर्णकुटी से वापसी करते समय मेरा मन उस काल की ओर भाग रहा था जिसे अभी इतिहासकारों द्वारा निश्चित नहीं किया जा सका है। इतिहासकार वैसे भी उन्हें कहां मानने को तैयार बैठे हैं ? उनके अस्तित्व को न मानने से शायद उन्हें  आधुनिक एवं वैज्ञानिक सोच का तमगा बैठे - बिठाए मिल जाए ! चलिए मत मानिए उनके अस्तित्व को, उनके आदर्शों  को तो मान लीजिए। एक ऐसे युग में पैदा हुए थे राम जब भारत एक विस्तारित देश  था, भले ही अलग-अलग राजाओं के अधीन रहा हो। पूरे देश  की एक संस्कृति थी, एक भाषा थी और सामान्यतः चहुँओर शांति  थी। कुछ विशिष्ट लोगों के लिए विशिष्ट  विज्ञान था, विकसित विज्ञान था। यह बात सच है कि यह विज्ञान सबके लिए नहीं था। आवागमन के साधन नहीं थे, संचार साधन नहीं थे और समाज सुविधाभोगी नहीं थे। अपने राज्य से हजारों मील दूर भयंकर दंडक वन में राम ने अपनी कुटिया बनाई और जंगल को अपनी तपस्या से बसने योग्य बनाया। भयंकर राक्षसों के बीच रहकर उनकी चुनौतियों को स्वीकारा, यह बात अलग है कि ये चुनौतियां उनके लिए बहुत मंहगी साबित

Most Read Posts

रामेश्वरम में

Bhairo Baba :Azamgarh ke

Maihar Yatra

इति सिद्धम

Azamgarh : History, Culture and People

...ये भी कोई तरीका है!

आइए, हम हिंदीजन तमिल सीखें

विदेशी विद्वानों के संस्कृत प्रेम की गहन पड़ताल

सीन बाई सीन देखिये फिल्म राब्स ..बिना पर्दे का

पेड न्यूज क्या है?