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राजा गुरु: हड़बड़ी में गड़बड़ी से बचें

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इष्ट देव सांकृत्यायन      हालाँकि वर्षफल का समग्र आकलन सौरमंडल में वार्षिक मंत्रिमंडल में सभी ग्रहों और उनके दायित्वों तथा गोचर में एक-दूसरे के साथ बन रहे युति-दृष्टि संबंधों के साथ-साथ  किसी देश की अपनी कुंडली में चल रही महादशा-अंतर्दशा का भी ध्यान रखकर किया जाता है। फिर भी , अपने-अपने दायित्व के अनुसार प्रत्येक ग्रह क्या फल देगा , यह भी देखा जाना चाहिए। इसमें भी मुख्यतः राजा और मंत्री का प्रभाव सबसे अधिक होता है। इस वर्ष के राजा हैं देवगुरु बृहस्पति और मंत्री मंगल। बृहस्पति स्वभावतः शांत होने के साथ-साथ ज्ञान और उसके प्रचार-प्रसार के आग्रही हैं। जबकि मंगल स्वभावतः उग्र , त्वरित प्रतिक्रिया करने वाले तथा सामान्य विरोधी को शत्रु मानकर दंडित करने के पक्षधर हैं। सौरमंडल में मंगल का स्थायी दायित्व सेनापति का है , जबकि बृहस्पति का स्थायी दायित्व विधिनिर्माता , विधिप्रवर्तक और प्रधानमंत्री का है। किसी भी ग्रह को वर्ष के लिए जो दायित्व मिलता है उसे निभाते हुए भी अपने मूल दायित्व के स्वभाव को वह नहीं छोड़ता। आज इस वर्ष के राजा यानी बृहस्पति की भूमिका पर वैश्विक संदर्भ ...

इतना भी अशुभ नहीं होगा ग्रहण

  इष्ट देव सांकृत्यायन   ॥श्री गुरु चरण कमलेभ्यो नमः॥ यद्येकस्मिन् मासे ग्रहणं रविसोमयोस्तदा क्षितिपाः। स्वबलक्षोभैः संक्षयमायांत्यतित्यतिशस्त्रकोपश्च॥ अर्थात यदि एक ही मास में सूर्य और चंद्र दोनों का ग्रहण हो तो अपनी-अपनी सेनाओं में हलचल मच जाने से या शस्त्रप्रहार से राजाओं का नाश होता है।   यह महर्षि वराहमिहिर कृत बृहत्संहिता के राहुचाराध्यायः का 26वाँ श्लोक है। कल एक मित्र ने बताया कि कोई दैवज्ञ ऐसा कह रहे हैं कि देश की सेनाओं में हलचल मच जाएगी। युद्ध तो होगा ही होगा , सरकार भी पलट जाएगी। मैंने दैवज्ञ जी को सुनने की जरूरत नहीं समझी। कौन सुने और क्यों ही सुने! आजकल सोशल मीडिया पर दैवज्ञ लोगों की बाढ़ हुई है। 56 साल के युवा नेता वाले देश में 20-30 साल के व्यापारधर्मा विद्वान अपने को खुद ही सद्गुरुदेव कह रहे हैं , जिन्हें कभी किसी सद्गुरु का दर्शन तक नहीं हुआ और रोज विज्ञापन पर विज्ञापन और व्हाट्सएप दर व्हाट्सएप ठेले जा रहे हैं कि बस हमसे अभिये मोक्ष की दीक्षा ले लो , नहीं तो टेम बीता जा रहा है। ऐसे ही कोई दैवज्ञ रहे होंगे और कहीं किसी अपने को पोलिटिकल कहने वाले गि...

आपदाओं के दुष्चक्र में फँस रहा अमेरिका-2

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इष्ट देव सांकृत्यायन [गतांक से आगे] ॥श्रीगुरुचरणकमलेभ्यो नम:॥ आपदाओं के दुष्चक्र में फँस रहा अमेरिका-1 वही दौर 2015 में फिर से शुरू हुआ। 2015 तक अमेरिका एक महाशक्ति बन चुका था। 2015 में राष्ट्रपति के रूप में अमेरिका के पास एक सधा हुआ व्यक्ति था – बराक ओबामा। लेकिन याद करें तो आप पाएंगे कि टोर्नाडो , मेगा सुनामी , फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाओं ने उस साल अमेरिका को एक तरह से घुटनों पर ला दिया था। इसकी शुरुआत भी दावानल से ही हुई थी और यह आग भी कैलिफोर्निया से ही शुरू हुई थी। 2015 के बाद से ऐसा एक भी साल नहीं है जब प्राकृतिक आपदाओं में बड़े पैमाने पर लोगों की जान न जा रही हो। कोरोना की रोकथाम में उनकी व्यवस्था पूरी तरह विफल सबित हुई। यह धौंसबाज अमेरिकी प्रशासन के लिए शर्म से डूब मरने वाली बात है। तब अमेरिका के राष्ट्रपति यही ट्रंप महाशय थे। 2020 में अर्थव्यवस्था की हालत यह हो गई थी कि इनका जीडीपी ग्रोथ रेट माइनस में चला गया था। अशिक्षा , महंगाई और बेकारी बेतहाशा बढ़ी है। फिस्कल डेफिसिट हर साल बढ़ रही है। राष्ट्रीय ऋण का हाल भी यही है। अमेरिका के कई राज्यों की हालत बद से बदतर होती गई है। ख...

ये हादसों का दौर है, सँभलकर चलें

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॥श्री गुरुचरण कमलेभ्यो नमः॥  मंगल 7 जून को सिंह राशि में आ गए हैं और 28 जुलाई तक यहीं बने रहेंगे। केतु वहाँ पहले से ही मौजूद हैं।   शनि मीन राशि में हैं , मंगल और केतु के साथ षडाष्टक बना रहे हैं। स्वाभाविक रूप से राहु से उनका द्विद्वादश संबंध बन रहा है। इसके बावजूद शनि थोड़े नियंत्रण में हैं। क्योंकि उन पर मिथुन में स्थित गुरु की दृष्टि है। यद्यपि इस समय गुरु स्वयं अस्त हैं और अतिचारी तो हैं ही। राहु उनकी दृष्टि से भी ओझल हैं और हों भी तो ऐसी स्थिति में राहु पर गुरु की दृष्टि बहुत प्रभावी नहीं होगी। एयर इंडिया विमान हादसा , ईरान पर आक्रमण , कंटेनर शिप में आग लगना और कई जगहों पर आगजनी की छिटपुट घटनाएँ जो हो चुकीं , उनके चलते जन-धन की जो क्षति हुई , उस पर अब केवल दुख जताया जा सकता है। उस क्षति की भरपाई किसी भी तरह नहीं की जा सकती। लेकिन आगे भी अभी बहुत सचेत रहने की जरूरत है। खासकर 28 जुलाई तक। सचेत इसलिए रहना चाहिए क्योंकि यह अंतिम नहीं है। भविष्य के गर्भ में अभी और भी कई अप्रिय घटनाएँ हैं। मंगल और केतु की युति जब तक है ,  तब तक बहुत सचेत रहना चाहिए। इस युति को अत्यंत अ...

शुरू हो चुका है अमेरिका का बुरा दौर

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॥श्री गुरु चरण कमलेभ्यो नमः ॥ आज लॉस एंजलिस में जो हो रहा है , वह कुछ लोगों के लिए आश्चर्यजनक हो सकता है , लेकिन मुझे इस पर कतई आश्चर्य नहीं है। पिछले दो ग्रहणों से लेकर अमेरिका की जन्मकुंडली तक के विश्लेषण से यही पता चलता है कि अमेरिका की नियति का सबसे बुरा दौर शुरू हो चुका है। यह बात मैं पहले ही कह चुका हूँ कि इसकी शुरुआत प्राकृतिक आपदा से होगी और प्रशांत महासागर के आसपास वाले क्षेत्रों से ही होगी। वही हुआ। हॉलीवुड , जो कि लॉस एंजलिस का ही एक हिस्सा है और प्रशांत महासागर की हा तटवर्ती है , महीनों तक पहले जंगल की आग और फिर बाढ़ ने वहाँ तबाही मचाई। बाद में अमेरिका में कई जगह भूकंप भी आए। प्राकृतिक आपदाओं का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। इसके पहले ही दंगे शुरू हो गए। ये दंगे भी व्यापक रूप लेते दिख रहे हैं। मैंने अमेरिकी चुनाव से ठीक पहले ही कहा था कि नया राष्ट्रपति डीप स्टेट के प्यादे से ज्यादा कुछ नहीं होगा। हालाँकि तब मेरे कई निकट मित्रों को ऐसा लगा था कि ट्रंप हार जाएंगे। शायद बाइडेन फिर से जीत जाएँ। कई लोगों ने यह बात कही भी थी और मैंने मना नहीं किया था। मैंने मना इसलिए नहीं किया था क्यो...

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