मुरादाबाद की पत्थरबाजिनें
इष्ट देव सांकृत्यायन मुरादाबाद शहर की करीब नौ लाख आबादी है और इसमें लगभग चार लाख मुसलमान हैं. क्या ये सारे ४ लाख मुसलमान सिर्फ तब्लीगी हैं ? अगर नहीं तो मुरादाबाद के किसी मुसलमान की ओर से पत्थरबाजों का विरोध क्यों नहीं किया गया ? इक्वल का दर्जा तो भारत में सबको मिला हुआ है. इसमें कोई दो राय नहीं है. आपको पहले ही मोर इक्वल मिला हुआ है. आज भारत के अगल बगल जो दो टुकड़े पड़े हुए हैं , वे इसी # मोर _ इक्वल के प्रमाण हैं. इतनी आबादी के बावजूद # अल्पसंख्यक शब्द की कोई परिभाषा तय किए बिना आपको जो अल्पसंख्यक दर्जा मिला हुआ है और उसके साथ हद से बहुत ज्यादा जो सुविधाएं मिली हुई हैं , वह इसी मोर इक्वल का साक्ष्य है. देश के दोनों तरफ दो टुकड़े फेंके जाने के बाद भी आप भारत में पूरे सम्मान से रखे गए और आपको आपकी धार्मिक शिक्षाओं वाले मदरसे , तमाम संस्थान और धर्मस्थल चलाने दिए गए , हर बहुसंख्यक ने हमेशा आपकी भावनाओं और सुविधाओं का ख्याल रखा , वह इसी मोर इक्वल का साक्ष्य है. एक बार अपने चारो तरफ नजर दौड़ाएं. और अपनी बदतमीजियों का भी हिसाब लगाइए. भारत ...