Teesari Punyatithi
तीसरी पुण्यतिथि - हरिशंकर राढ़ी और आज मां की तीसरी पुण्यतिथि आ गई। धीरे-धीरे तीन साल का समय निकल गया । इधर व्यस्तताओं के चलते ब्लाग पर आना जाना भी काफी कम हो गया और ब्लॉग के मित्रों से संवाद भी बहुत कम हो गया। यह बात अलग है कि ब्लॉग पर आने का मन बहुत होता है। यहां की आजादी याद आती है। पिछली दोनों पुण्यतिथियों पर अपनी पीड़ा और अपनी भावनाओं को ब्लॉग पर उंडे़ल गया था। इस बीच एक साल और निकल गया और आज फिर वह दिन आ गया कि मां को याद करूं, यह महसूस करूं कि मां अब नहीं रही और जिंदगी मां के बिना ही चल रही है। इसमें दो राय नहीं कि समय के मरहम ने अपना काम किया है और धीरे-धीरे दर्द की तीव्रता में कमी आ रही है। लेकिन यह भी सच नहीं है कि समय का मरहम पूरी तरह प्रभावी हो गया है। हो भी नहीं सकता क्योंकि कुछ क्षतियां अपूरणीय होती हैं और वह क्षति जो किसी के अस्तित्व से जुड़ी हो या अस्तित्व ही जिससे हो उसे तो कोई भी भर नहीं सक...