वर्चस्वकारी तबका नहीं चाहता है कि हाशिये के लोग मुख्यधारा में शामिल हों
9 मई को वर्धा के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में हुए इस आयोजन की रिपोर्ट अमित विश्वास ने ईमेल के ज़रिये भेजी है. बिलकुल वही रपट बिना किसी संपादन के आप तक पहुंचा रहा हूं. महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में ''हाशिये का समाज'' विषय पर आयोजित परिसंवाद में बतौर मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रसिद्ध आदिवासी साहित्यकार व राजस्थान के आई.जी.ऑफ पुलिस पद पर कार्यरत हरिराम मीणा ने कहा कि समाज का वर्चस्वकारी तबका नहीं चाहता है कि हाशिये के लोग मुख्यधारा में शामिल हों। फादर कामिल बुल्के अंतरराष्ट्रीय छात्रावास में आयोजित समारोह की अध्यक्षता विवि के राइटर-इन-रेजीडेंस सुप्रसिद्ध साहित्यकार से.रा. यात्री ने की। इस अवसर पर विवि के राइटर-इन-रेजीडेंस कवि आलोक धन्वा, स्त्री अध्ययन के विभागाध्यक्ष डॉ.शंभु गुप्त मंचस्थ थे। हरिराम मीणा ने विमर्श को आगे बढाते हुए कहा कि स्त्री, दलित, आदिवासी, अति पिछड़ा वर्ग, ये 85प्रतिशत समाज हाशिये पर हैं, इसी पर प्रजातांत्रिक प्रणाली टिकी हुई है। दिन-रात मेहनत करने पर भी इन...