Posts

Showing posts with the label कला

...ये भी कोई तरीका है!

Image
  इष्टदेव सांकृत्यायन ऐसा लग रहा है जैसे अभी कल की ही तो बात है और आज एकदम से सन्न कर देने वाली यह सूचना मिली - मनोज जी ( प्रो. मनोज कुमार सिंह ) नहीं रहे। दस पंद्रह दिन पहले उनसे बात हुई थी। तब वह बिलकुल स्वस्थ और सामान्य लग रहे थे। हमारी बातचीत कभी भी एक घंटे से कम की नहीं होती थी। फोन पर बात करते हुए पता ही नहीं चलता था कि बात कितनी लंबी खिंच गई। अभी जब 21 को बात हुई तब पेंटिंग के अलावा कुछ कविताओं पर बात हुई। यह बहुत कम लोग जानते हैं कि देश-विदेश में चित्रकला , और उसमें भी खासकर भित्तिचित्र ( murals) विधा के लिए जाने जाने वाले डॉ. मनोज कविताएं भी लिखते थे। अभी वे एक ऐसा संग्रह लाना चाहते थे जिसमें कविताओं के साथ चित्र हों। लेकिन अब कौन लाएगा। यह तो केवल वही कर सकते थे। वे ऐसा ही मेरा भी एक संग्रह देखना चाहते थे। मेरे एक संग्रह के लिए उन्होंने कवर का चित्र बनाया भी। लेकिन न तो वह संग्रह आ पाया और न चित्र। नहीं , उसमें हमारी ओर से कोई ढिलाई नहीं थी। दोनों भाइयों ने अपना-अपना काम बड़ी शिद्दत से किया था लेकिन प्रकाशक तो प्रकाशक ही होता है। हिंदी में जिसने प्रकाशक को जान लिया , व...

याली : एक मिथकीय आकृति

Image
नितीश ओझा रावण के दरबार में जब अंगद आते हैं तो उनके पीछे के खम्भों पर यही आकृति बनी हुई है . यह एक पौराणिक आकृति है जिसकी आधी आकृति शेर , आधी हाथी और आधी आकृति घोड़े की भी होती है. दक्षिण भारतीय मंदिरों में अक्सर खम्भे पर पाई जाने वाली एक आकृति , जिसका नाम याली है जो संस्कृत के व्याल से निकला जिसका अर्थ रक्षक , और कुछ स्थानों पर गज मुख सर्प से है यथा खलनायक रूप में , नाट्यशास्त्र में इनका सम्बन्ध दस नाम रूप दंडक से भी है 15 वी शताब्दी   में विकसित इस आकृति को दक्षिण भारत के सभी मंदिरों में देखा जा सकता - मदुरै तमिलानाडू , चेन्ना केशव , थिरुवन्नमलाई , हलेबीडू , होयसल मंदिरों कर्णाटक इत्यादि. मदुरै के मीनाक्षी नायक मंडपम में आपको 1000 याली दीखते हैं.  भारत के बाहर भी यह आकृतियाँ मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों में मिलती हैं , बर्मा थाईलैंड , कम्बोडिया , लाओस के बौद्ध मंदिरों में पैगोडा के आगे भी यह आकृति एक Guard / रक्षक के रूप मे मिलती है जहां इनका नाम Chinthe है . बौद्ध धर्म की कहानियों में इसका जन्म एक रानी से हुवा जिसने एक शेर (सिंह) से विवाह किया लेकिन कालांतर में उस शे...

Most Read Posts

रामेश्वरम में

Bhairo Baba :Azamgarh ke

इति सिद्धम

Azamgarh : History, Culture and People

Maihar Yatra

विदेशी विद्वानों के संस्कृत प्रेम की गहन पड़ताल

...ये भी कोई तरीका है!

निज़ामाबाद और शीतला माता

पेड न्यूज क्या है?