तीसरा आदमी
इष्ट देव सांकृत्यायन आज ही ख़बर देखी ‘हर तीसरा भारतीय भ्रष्ट’. केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त, भगवान जाने यह क्या होता है. इस खबर के पहले तक तो मुझे पता भी नहीं था. क्योंकि देश में न तो मैंने कोई सतर्कता होते देखी और न सतर्कता के चलते कोई दुर्घटना या भ्रष्टाचार रुकते देखा. जहां जो होना होता है, वह हो ही जाता है. अगर कुछ नहीं होता तो यह या करना चाहने वाली की हुनर या फिर उसकी इच्छाशक्ति में कमी की वजह से होता है. हम शुरू से मानते आ रहे हैं कि जो हो जाता है वह ईश्वर की इच्छा से होता है और जो नहीं होता है, वह इसीलिए नहीं होता क्योंकि ईश्वर की इच्छा नहीं होती. हम शुरू से मानते हैं कि ईश्वर की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता. इसीलिए हम यह भी मानते आए हैं कि सरकारी दफ्तर में बाबू या साहब अगर आपसे रिश्वत ले लें तो वह भगवान मर्जी है. लेकर काम कर दें तो वह भी भगवान की मर्जी और लेकर भी न करें तो वह भी भगवान की मर्जी. भगवान ने किसी सरकारी दफ्तर में बाबू, साहब या चपरासी बनाया हो और घूस न ले, ऐसी कोताही तो वह किसी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं कर सकते. इसीलिए ऐसे लोगों को सरकारी दफ्तरों से जल्दी ही एग्ज़िट का ग...