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Showing posts from 2021

Omkareshwar Jyotirlinga (Narmada ke Omkareshwar)

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यात्रा संस्मरण नर्मदा के ओंकारेश्वर               - हरिशंकर राढ़ी ओंकारेश्वर  मंदिर का एक दृश्य  महाकाल नगरी उज्जैन कई बार जाने के बावजूद वहाँ से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर दूर नर्मदातट पर स्थित ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की अब तक मात्र दो यात्राएँ ही हो पाईं। हाँ , इतना अवश्य है कि जब भी उज्जैन जाना होता है , ओंकारेश्वर का मनोरम वातावरण बहुत गंभीरता से बुलाता है। यदि एक बार ओंकारेश्वर और नर्मदा तट पर पहुँच गए तो लौटते समय दुबारा आने का लोभ वहीं से प्रारंभ हो जाता है। द्वादश ज्योर्तिलिंगों की यात्रा में अभी केदारनाथ का सौभाग्य नहीं मिला है। निःसंदेह केदारनाथ प्राकृतिक दृष्टि से सर्वाधिक समृद्ध होगा , किंतु अन्य ज्योतिर्लिंगों की बात की जाए तो जो प्राकृतिक रमणीयता ओंकारेश्वर में है , वह किसी अन्य में नहीं है। अपनी लघु पर्वतीय सीमाओं में कल-कल , छल-छल करती नर्मदा , प्रातःकाल नर्मदा के स्वच्छ जल में नहाते लोग , नदी के दोनों ओर ज्योतिर्लिंगों के रूप में स्वयंभू ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग जैसे पौराणिक स्थल प्रकृति और अध्यात्म का एक दुर्लभ दृश्य उपस्थित करते हैं। महीना नवंबर

विदेशी विद्वानों का संस्कृत प्रेम ( समीक्षा)

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समीक्षा विदेशी विद्वानों के संस्कृत प्रेम की गहन पड़ताल                                   - हरिशंकर राढ़ी ( विदेशी विद्वानों का संस्कृत प्रेम ’ -  जगदीश प्रसाद बरनवाल ‘ कुंद ’) विश्व की प्राचीनतम एवं सर्वाधिक व्यवस्थित भाषा का पद पाने की अधिकारी संस्कृत आज अपनी ही जन्मभूमि पर भयंकर उपेक्षा का शिकार है। उपेक्षा ही नहीं , कहा जाए तो यह कुछ स्वच्छंदताचारियों या अराजकतावादियों की बौद्धिक हिंसा का भी शिकार है। भले ही व्याकरण के कड़े नियमों में बँधी हुई संस्कृत दुरूह है , किंतु इसके साहित्य और लालित्य को समझ लिया जाए तो शायद ही विश्व की किसी सभ्यता का साहित्य इसके बराबर दिखेगा। इसे अतीत के एक खासवर्ग की भाषा मानकर जिस तरह गरियाया जा रहा है , वह एक विकृत राजनीतिक मानसिकता का परिचायक है।यह हमारे यहाँ ही संभव है अपनी प्राचीन भाषाओं को जाति , क्षेत्र और वर्ग के राजनीतिक चश्मे से देखा जाए। यदि संस्कृत भाषा और साहित्य इतना ही अनुपयोगी और दुरूह होती तो यूरोप सहित अन्य महाद्वीपों के असंख्य विद्वान इसके लिए अपना जीवन होम नहीं कर देते। हाँ , यह विडंबना ही है कि हमें अपनी विरासत का महत्त्व विदेशियो

संवेदना के धागों से बुनी गई किताब है ‘जिंदगी का बोनस’

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अशोक चक्रधर ने किया सच्चिदानंद जोशी की पुस्तक का लोकार्पण नई दिल्ली।   प्रख्यात संस्कृतिकर्मी और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव   डा. सच्चिदानंद जोशी की रम्य रचनाओं की पुस्तक  ‘ जिंदगी का बोनस ’  का लोकार्पण इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में पद्श्री से अलंकृत प्रख्यात व्यंग्यकार अशोक चक्रधर ने किया। इस मौके पर पद्मश्री से सम्मानित नृत्यांगना शोभना नारायण , भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो.संजय द्विवेदी , कथाकार अल्पना मिश्र , प्रभात प्रकाशन के प्रभात कुमार विशेष रूप से उपस्थित थे। समारोह को संबोधित करते हुए आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो.संजय द्विवेदी ने कहा कि लेखक की सह्दयता ने जिंदगी की बहुत साधारण घटनाओं को  ‘ जिंदगी का बोनस ’  बना दिया है , यह किताब संवेदना के धागों से बुनी गई है। लेखक की यही संवेदना , आत्मीयता और आनंद की खोज इस पुस्तक का प्राणतत्व है। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि श्री जोशी बहुमुखी प्रतिभासंपन्न और सह्दय व्यक्ति हैं , उनके इन्हीं गुणों का विस्तार इन रम्य रचनाओं में दिखता है। इस संग्रह की एक रचना  ‘ इफ्तार ’  उनकी संवेदना का सच्चा बयान है। श्री जोशी की खा

वैज्ञानिक दृष्टिकोण के लिए अपनी भाषा का विकास आवश्यक

नई दिल्ली। वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सीखने की प्रक्रिया के लिए , अपनी भाषा में ज्ञान होना और वैज्ञानिक तथा उचित रूप से अपनी भाषा का विकास करना आवश्यक है। ये विचार केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के हीरक जयंती समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम के मुख्यह अतिथि माननीय शिक्षा मंत्री श्री ' निशंक ' ने उदघाटन करते हुए शब्दावली आयोग परिवार को हीरक जंयती समारोह के उपलक्ष्यर में बधाई एवं शुभकामनाऍं दीं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग ने 60 साल की अपनी गौरवपूर्ण यात्रा में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण काम किया है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए श्री पोखरियाल ने हीरक जयंती समारोह के अवसर पर शब्दावली आयोग परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि 6 दशक की अपनी शानदार यात्रा के दौरान विज्ञान ,  इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी ,  कृषि और चिकित्सा विज्ञान सहित विभिन्न विषयों में 9 लाख से अधिक अंग्रेजी शब्दों के लिए वैज्ञानिक और तक

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गढ़ तो चित्तौडग़ढ़...