वचन लल्लेश्वरी के
कुस मरि तय कसू मारन। मरि कुस तय मारन कस॥ युस हर-हर त्राविथ गर-गर करे। अद सुय मरि तय मारन तस॥ [कौन मरता है और कौन है जो मारा जाता है बस वही जिसने भुला दिया ईश्वर का नाम और खो गया संसार की विषय-वासनाओं में वही है जो मरता है और वही है जो मारा जाता है॥] शिव चुय थाली थाली रोज़न। मो ज़न हिंदू ता मुसलमान॥ त्रुक अय चुक पन पनुन प्रजनव। सोय चय साहिबस जानिय जन॥ [सर्वत्र व्याप्त हैं शिव , कण-कण में शिव का वास। कभी न करो भेद क्या हिंदू और क्या मुसलमान॥ देखो अपने भीतर , यदि हो तुम चतुर सुजान। मन के मंदिर में ही तेरे है बैठा भगवान॥] मूढस ज्ञानच कथ न वएंजे। खरस गोरे दिना रवि दोह॥ स्येकि शठस बोलि न वएंजे। कोम यज्ञन रावी तील॥ [मूढ़ को कभी न दो भक्ति का ज्ञान वृथा प्रयत्न यह वैसे जैसे गधे को खिलाओ गुड़ यह है वैसे जैसे मरुथल में बो देना बीज ऐसे जैसे व्यर्थ गंवाना तेल चोकर से पूड़ियां बनाने में] चाहे कोई हिंदू हो या मुसलमान , अगर बात-बात में बतौर उदाहरण इन पदों का इस्तेमाल करता न मिले तो समझिए कि वह और चाहे कुछ भी हो , कश्मीरी तो नहीं हो सकता। जानत...