नाम में क्या नहीं रक्खा!
हाल ही में मार्क जुकरबर्ग ने अपनी बहन रैंडी जुकरबर्ग को किसी उपलब्धि पर बधाई दी थी। इसके तुरंत बाद ही रैंडी के नाम का अपने हिसाब से देसी अर्थ निकालकर भाई लोग पिल पड़े। केवल भारत नहीं , पूरा दक्षिण एशिया शामिल था उनमें। खैर , अच्छी बात रही कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। शायद वे जानते हैं कि इतिहास जो भी रहा हो , आज का सच यह है कि एशियाई समाज एक यौन कुंठित समाज है। और तो जाने दीजिए , हम भारत के भीतर ही कई बार ऐसा करते हैं। पंजाब के कुछ नाम उत्तर प्रदेश , बिहार या मध्य प्रदेश में कुछ अन्यथा अर्थ देते हैं। ठीक वैसे ही उत्तर प्रदेश , बिहार या मध्य प्रदेश के नाम पंजाब या तमिलनाडु में भी। यह स्थानीय बोलियों और भाषाओं में शब्दों की अर्थ-छवियों के वैविध्य का परिणाम है। जो एक बार पूरा भारत घूम लेता है , वह इससे सहज हो जाता है। एक जगह में सिमटा व्यक्ति ऐसे ही बार-बार हैरत में पड़ता रहता है। इसी क्रम में एक और बात होती है , नामों को धर्म से जोड़कर देखना। ऐसे तो नामों का किसी धार्मिक पंथविशेष से कुछ लेना-देना है नहीं। क्योंकि नाम संज्ञा हैं और संज्ञाएं शब्द हैं। शब्द किसी भाषाविशेष के हो...