जाग मछेंदर गोरख आया-3
कल लिखने बैठा तो मन थोड़ा भन्नाया हुआ था. सोच ही नहीं पा रहा था कि शुरू कहाँ से करूँ. वजह कुछ ख़ास नहीं , बस एक दुविधा थी. दुविधा यह कि आगे की कड़ी बढ़ाएँ कहाँ से. मन यह बन रहा था कि पहले जन्म से जुड़े सारे मिथकों की सारी चर्चा कर ली जाए. क्योंकि पिछली पोस्ट में जिस मिथक ज़िक्र किया वह कई मिथकों में से एक ही है. वह जो लगभग उत्तर भारत में प्रचलित है. लगभग माने बिहार , उत्तर प्रदेश , पंजाब और हिमाचल तक. राजस्थान के कुछ भागों में यही मिथक है और कुछ में दूसरा. इसी से मिलता-जुलता. इसी से मिलती-जुलती कई लोकगाथाएँ कई दूसरे क्षेत्रों में भी हैं. लेकिन पूर्वोत्तर भारत में भिन्न. गुजरात में कुछ और भिन्न. नेपाल और तिब्बत में और भिन्न. एक और बात है. मिथक या कहें लोकगाथाएँ या लोकवार्ताएँ मुझे आकर्षित बहुत करती हैं. जानते हुए भी कि इनमें तथ्य कम , भाव ज़्याद है और तथ्य अगर है भी तो वह बहुत गूढ़ अर्थ या कह लें लक्षणा में मौजूद है , जिसे निकालना बहुत जटिल काम है ; मैं अपने को उनको उन्हें जानने और उनकी चर्चा करने से रोक नहीं पाता. लेकिन जरूरी मुझे यह लग रहा था कि पहले काल की चर्चा कर ली जाए. हाल...