अतीत का आध्यात्मिक सफ़र-3 (ओरछा)
इष्ट देव सांकृत्यायन रानी महल के झरोखे से चतुर्भुज मंदिर का दर्शन व्यवस्था और अव्यवस्था कालिदास का मेघदूत हम पर मेहरबान था। पूरे रास्ते मूसलाधार बारिश का मज़ा लेते दिन के साढ़े दस बजे हम ओरछा पहुंच गए थे। पर्यटन स्थल होने के नाते यह एक व्यवस्थित कस्बा है। टैक्सी स्टैंड के पास ही बाहर से आने वाले निजी वाहनों के लिए भी अलग से व्यवस्थित पार्किंग है। सड़क के दाईं ओर मंदिरों का समूह है और बाईं ओर महलों व अन्य पुरातात्विक भवनों का। मध्यकालीन स्थापत्य कला के जैसे नमूने यहां चारों तरफ़ बिखरे पड़े हैं, कहीं और मिलना मुश्किल है। सबसे पहले हम रामराजा मंदिर के दर्शन के लिए ही गए। एक बड़े परिसर में मौजूद यह मंदिर का$फी बड़ा और अत्यंत व्यवस्थित है। अनुशासन इस मंदिर का भी प्रशंसनीय है। कैमरा और मोबाइल लेकर जाना यहां भी मना है। दर्शन के बाद हम बाहर निकले और बगल में ही मौजूद एक और स्थापत्य के बारे में मालूम किया तो पता चला कि यह चतुर्भुज मंदिर है। तय हुआ कि इसका भी दर्शन करते ही चलें। यह वास्तव में पुरातत्व महत्व का भव्य मंदिर है। मंदिर के चारों तर$फ सुंदर झरोखे बने हैं और दीवारों पर आले ...