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ममता का अपना ही सर्वे कह रहा - अलविदा दीदी

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  अवनीश पी.एन. शर्मा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने राजनीतिक कंसल्टेंट प्रशांत किशोर की कंपनी इंडियन पोलिटिकल एक्शन कमेटी ( I-PAC) को राज्य में राजनीतिक सर्वे का काम सौंपा था। इस साल मार्च से जुलाई तक 6 महीने तक किए गए इस सर्वे के अनुसार ममता बनर्जी की तृणमूल सरकार के प्रति राज्य के मतदाताओं में भीषण नाराजगी है। तृणमूल के एमएलए उच्चतम स्तर की एंटी-इनकंबेंसी झेल रहे हैं और सर्वे साफ कहता है कि ऐसे में पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार बना पाने की स्थिति नहीं रहेगी। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव अगले साल अप्रैल-मई के बीच होने हैं।  प्रशान्त किशोर की कंपनी ने पूरे राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर तीन स्तरीय यानी तीन बार यह जमीनी आकलन किया। पहला सर्वेक्षण इसी साल मार्च में कोरोना के चलते हुए पहले लाकडाउन के ठीक पहले किया गया। दूसरा सर्वे जून के महीने में तो अंतिम सर्वे अगस्त के तीसरे हफ्ते में किया गया। जमीनी रिपोर्ट्स कहते हैं कि जो तृणमूल मार्च के पहले सर्वे में विधानसभा की 110 सीटों पर अच्छा कर रही थी , वह अब तीसरे दौर के आकलन में मात्र 78 सीट...

उन्नीस में हाफ, इक्कीस में साफ

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अवनीश पी. एन. शर्मा लोकसभा 2019 के चुनाव में पश्चिम बंगाल भाजपा का यह नारा था जिसका अर्थ है : 2019 लोकसभा चुनाव में राज्य की आधी विधानसभा सीटों पर विजय हासिल करना और उसके दम पर 2021 बंगाल विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल सरकार को सत्ता से बाहर (साफ) करना। भाजपा अपने इस लक्ष्य में सफल रही और उसने बंगाल विधानसभा की कुल 294 सीटों में से 140 से अधिक विधानसभाओं में शुआती बढ़त पा कर 122 विधानसभा सीटों जीत हासिल करते हुए 2019 लोकसभा में बंगाल की कुल 42   में से 18 सीटों पर जीत दर्ज किया। उन्नीस के आम चुनावों में पश्चिम बंगाल में भाजपा के पक्ष में 40.5 प्रतिशत मत पड़े थे और फिलहाल विधानसभा में उसके छह विधायक हैं। लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 23 सीटों का लक्ष्य रखा था और 18 सीटें मिलीं। 2021 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव उसका लक्ष्य 250 सीटों का है। 2014 में 34 लोकसभा सीटें जीतने वाली तृणमूल कांग्रेस 2019 में 22 सीटें ही जीत पाई। कांग्रेस चार सीटों से घट कर दो पर आ गई और माकपा अपना खाता भी नहीं खोल पाई। 2019 के आम लोकसभा चुनावों से एक साल पहले राज्य में हुए पंचायत चुनावो...

जनहित में जगतु तपोवन सो कियो

इष्ट देव सांकृत्यायन  कहलाने एकत बसत अहि मयूर मृग बाघ। जगतु तपोवन सो कियो दीरघ दाघ निदाघ॥ रीतिकाल के अधिकतर कवियों के बारे में यह आम धारणा है कि उन्होंने जो लिखा राज दरबार के लिए लिखा। बिहारी भी इस धारणा से मुक्त नहीं हैं। यह अलग बात है कि उनके ‘ दोहरे ’ यानी ‘ दोहे ’ हिंदी साहित्य जगत में ‘ नावक के तीर ’ माने जाते हैं , जो ‘ देखन में छोटे लगें ’ लेकिन ‘ घाव करें गंभीर ’ । हालांकि ‘ नावक ’ के तीर को लेकर भी बड़ी भ्रांतियां हैं , लेकिन इस पर फिर कभी। अभी मामला साहित्य का नहीं , राजनीति का है। पता नहीं , कविवर बिहारी का अपने समय की राजनीति से कितना और कैसा संबंध था , पर इतना तो है कि आज की राजनीति पर उनका यह ‘ दोहरा ’ सोलह आने सच साबित होता है। वह कौन सा ‘ दीरघ दाघ निदाघ ’ है जिसके प्रचंड तेज से भाई-भतीजावाद , कुल-गोत्रवाद , जाति-क्षेत्रवाद , भाषा-प्रांतवाद और इन सबसे बढ़कर वोटबैंक आधारित टिकट-मूल्यवाद के पुण्य आलोक से आलोकित आज का राजनीतिक जगतु तपोवन-सा नहीं , बल्कि वाक़ई तपोवन ही हो गया है , इस पर कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है। क्षमा चाहता हूँ , लेकिन यह सच है कि श्रीमद्भगवद...

राहुल गांधी के जूते में आपके पैर

राहुल गांधी के मन में नरेंद्र मोदी के प्रति कितना प्यार है , यह किसी से छिपा नहीं है. वैसे तो संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर भाषण देते समय राहुलजी की आवाज़ और उनके हाव-भाव से ही सब कुछ जाहिर हो रहा था , लेकिन नई पीढ़ी भी अभी 2002 से लेकर अब तक ख़ुद राहुलजी , उनकी माताजी और उनके भिन्न-भिन्न पार्टीजनों की ओर से नरेंद्र मोदी को दिए गए विशेषण अभी भूली नहीं है. कांग्रेसजनों की ओर से मोदी को दिया गया प्रत्येक विशेषण यह बताने के लिए काफ़ी है कि राहुलजी या कोई भी कांग्रेसजन नरेंद्र मोदी से कितना प्यार करता है. इस देश की जनता ने इस बात को हँसकर उड़ा दिया. मैं नहीं समझ पा रहा कि इसे बेबुनियाद और अगंभीर बातों को ऐसे ही हँसकर उड़ा देने की उसकी कला माना जाए , या फिर तथ्यों से ठीक उलट बातों के प्रति उसकी सहिष्णुता का बेजोड़ नमूना. ख़ैर , मैं बात तथ्यों पर नहीं करने जा रहा हूँ. मैं बात तेदेपा की ओर से लाए गए और देश की कई प्रमुख पार्टियों की ओर से समर्थित लेकिन बेतरह धड़ाम हो गए अविश्वास प्रस्ताव और उसके औचित्य पर भी नहीं करने जा रहा. ना , मैं उस घिसी-पिटी स्क्रिप्ट की तो कोई बात ही नहीं कर सकता. क्...

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