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ek geet

कारवाँ क्या करूँ (जीवन के तमाम चमकीले रंगों के बीच श्वेत - श्याम  रंग का अपना अलग महत्त्व होता है।  बाहर से रंगहीन दिखने वाली सूरज की किरणों में इन्द्र धनुष  के सातो रंग समाए होते हैं । श्वेत - श्याम  रंग में बना ये क्लॉसिकल चित्र आप भी देखें और सोचें- )  अंजुमन स्याह सा, हर चमन आह सा दर्द की राह सा मैं रहा क्या करूँ ? दौड़ते - दौड़ते, देखते - देखते मंजिलें लुट गईं ,कारवाँ क्या करूँ ?  जिन्दगी -जिन्दगी तू बता क्या करूँ ? अपनी अर्थी गुजरते रहा देखते और मैंने ही पहले चढ़ाया सुमन खुद चिता पर लिटाकर उदासे नयन रुक गए पाँव लेकर चला जब अगन पुष्प  क्या हो गए , हाय कैसा नमन - नागफनियों के नीचे दबा था कफन ! अलविदा कर लिया हर ख़ुशी  का सजन रो पड़ीं लकड़ियाँ आंसुओं में सघन और चिता बुझ गई, कैसे होगा दहन ? देखकर वेदना यह सिसकती चिता मरमराने लगी प्रस्फुटित ये वचन - तुम कहाँ योग्य मेरे प्रणय देवता लौट जाओ नहीं मैं करूँगी वरण,           हम खड़े के खड़े , मूर्तिवत हो जड़े       दर्द को भ...

kaisa chandan

कैसा चन्दन होता है    ( यह गज़ल १९९४ में लिखी गई थी और आज अचानक ही कागजों में मिल गई . बिना किसी परिवर्तन, संशोधन के आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ.बीते दिनों का स्वाद लें .) सूनेपन में कभी- कभी जब यह मन आँगन होता है। स्मृतियों के सुर-लय पर पीड़ा का नर्तन होता है। क्या स्पर्श पुष्प  का जानूँ, क्या आलिंगन क्या मधुयौवन जी  करता  भौंरे  से  पूछूँ  -  कैसा  चुम्बन होता है। लोग  पूछते  इतनी  मीठी  बंशी  कौन  बजाता है ध्वस्त  हो  रहे खंडहरों  में  जब  भी  क्रंदन होता है। हिमकर  के आतप से जलकर शारदीय  नीरवता में राढ़ी  ने ज्वाला  से  पूछा  - कैसा  चंदन  होता है। प्यार मर गया सदियों पहले, जिस दिन मानव सभ्य हुआ अब तो  उसके  पुण्य दिवस  पर   केवल  तर्पण होता है।

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