ek geet
कारवाँ क्या करूँ (जीवन के तमाम चमकीले रंगों के बीच श्वेत - श्याम रंग का अपना अलग महत्त्व होता है। बाहर से रंगहीन दिखने वाली सूरज की किरणों में इन्द्र धनुष के सातो रंग समाए होते हैं । श्वेत - श्याम रंग में बना ये क्लॉसिकल चित्र आप भी देखें और सोचें- ) अंजुमन स्याह सा, हर चमन आह सा दर्द की राह सा मैं रहा क्या करूँ ? दौड़ते - दौड़ते, देखते - देखते मंजिलें लुट गईं ,कारवाँ क्या करूँ ? जिन्दगी -जिन्दगी तू बता क्या करूँ ? अपनी अर्थी गुजरते रहा देखते और मैंने ही पहले चढ़ाया सुमन खुद चिता पर लिटाकर उदासे नयन रुक गए पाँव लेकर चला जब अगन पुष्प क्या हो गए , हाय कैसा नमन - नागफनियों के नीचे दबा था कफन ! अलविदा कर लिया हर ख़ुशी का सजन रो पड़ीं लकड़ियाँ आंसुओं में सघन और चिता बुझ गई, कैसे होगा दहन ? देखकर वेदना यह सिसकती चिता मरमराने लगी प्रस्फुटित ये वचन - तुम कहाँ योग्य मेरे प्रणय देवता लौट जाओ नहीं मैं करूँगी वरण, हम खड़े के खड़े , मूर्तिवत हो जड़े दर्द को भ...