अशआर
शेर किसका है मालूम नही. ऐसे ही गालिब-ओ-मीर पर बाते करते आज ये शेर विनय ने सुनाया. जानते वह भी नही कि किसका है. मुझे अच्छा लगा, लिहाजा आपके लिए भी - दिल मे रहो जिगर मे रहो नजर मे रहो सब तुम्हारे ही लिए है चाहे जिस घर मे रहो अब ये हाल है दर-दर भटकती फिरती है मुसीबतो से कहा मैने मेरे घर मे रहो. Technorati Tags: