पेड न्यूज क्या है?
प्रकाश अस्थाना जब भी आम चुनाव निकट होते हैं , तो चुनाव आयोग और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से एक निर्देश जारी होता है कि मीडिया में पेड न्यूज नहीं चलाई जाएं अन्यथा समुचित कार्रवाई होगी। आम पाठक भले ही इसे अधिक गहराई से न समझ सके , लेकिन मीडिया से जुड़े लोग इस बात को समझते हैं। होना यह चाहिए कि पाठकों या चैनल दर्शकों तक पेड न्यूज की बारीकियों को कोई ठीक तरीके से पहुंचाए या उन्हें समझाए...मीडिया खुद ऐसा करेगा नहीं , क्योंकि यह अपने पांव में कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा !! तो फिर कौन करेगा ? ऐसे में सूचना प्रसारण मंत्रालय को ही कमर कसनी होगी , वह भी पूरी ईमानदारी के साथ..। साभार: https://www.indianfolk.com/menace-paid-news-edited-2/ पेड न्यूज... चुनावों के दौरान किसी पार्टी विशेष या चुनाव में खड़े उम्मीदवार का महिमामंडन करने जैसी खबरें पैसे लेकर दिखाने अथवा छापने को अभी तक पेड न्यूज समझा जाता है.. लेकिन अब इसका रूप भी बदल चुका है और समय सीमा की कोई LOC भी निर्धारित नहीं है। यानि , बारहों महीने..। .. जी हां , है कड़वा लेकिन सच तो यही है। अब खबरों के बदले पैसा बनाने का खेल चुनावी मौसम ...