समकालीन अभिव्यक्ति का रामदरश मिश्र पर एकाग्र अंक
हरिशंकर राढ़ी हमारे समय के वरिष्ठतम साहित्य मनीषी प्रो. रामदरश मिश्र आज अपने जीवन के 96 वर्ष पूरे कर 97वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। मिश्र जी के जीवन का लगभग डेढ़ दशक का समय छोड़कर शेष समस्त जीवन उच्च कोटि की साहित्य साधना वाला जीवन रहा है। अपनी साहित्य साधना के क्रम में उन्होंने कविता, कहानी, गज़ल, उपन्यास, संस्मरण, यात्रावृत्तांत, आत्मकथा, ललित निबंध, डायरी और आलोचना जैसी हर विधा में प्रचुर एवं महत्त्वपूर्ण साहित्य रचा। ऐसे साहित्यमनीषी विरले ही होते हैं जो उच्च साहित्यिक मूल्यों को लेकर चलते रहते हैं और बिना किसी पूर्वाग्रह या प्रवंचना के अपना कार्य करते जाते हैं। मिश्र जी के 97वें जन्मदिवस पर समकालीन अभिव्यक्ति अपना ‘रामदरश मिश्र एकाग्र’ (अंक 63-64, जनवरी-जून, 2020) अंक लेकर आई है। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के चलते उत्पन्न अभूतपूर्व संकट और उससे बरती जा रही सावधानी के अंतर्गत हुए लॉकडाउन के कारण इस अंक की मुद्रित प्रति अभी नहीं आ पाई है। अतः मिश्र जी के जन्मदिवस पर हम इस अंक को सोशल मीडिया और वेबसाइट के माध्यम से हिंदी साहित्य के पाठकों, उनके स्नेही मित्रों एवं ले...