Posts

Showing posts with the label school

गुरुओं को अक्सर लठैतों की भूमिका में ही देखा

स्कूल में गुरुओं को मैंने अक्सर लठैत की भूमिका में ही देखा, कब किस बात पर ठोक दे पता ही नहीं चलता था, ऊपर से तुर्रा यह कि गुरु की पिटाई को आर्शिवाद समझना चाहिये। मैथ का एक लंगड़ा टीचर तो इतना मरखंड था कि बाप रे बाप....आज भी उसके बारे में सोंचता हूं तो हड्डी में सिहरन होती है। एक मोटा सा रूल हमेशा उसके हाथ में होता था, और जिस गति से उसका रूल चलता था उसे देखकर यही लगता था कि बचपन में इसके गुरू ने भी इसकी खूब धुलाई की होगी, बिना तोलमोल के। मारकूट के बच्चों को पढ़ाने की अदा निराली थी। लेकिन चकचंदा के दिन उसकी नरमी देखते बनती थी। छोटे से कस्बे में गुरुदक्षिणा के नाम पर यह सार्वजनिक वसूली का दिन होता था। सुबह से उसके होठों पर रसगुल्ले टपकते रहते थे। सभी छात्रों को इकठ्ठा करके द्वार-द्वार जाता था और मोटा धन समेटने की जुगाड़ में रहता था। आंटा, चावल, दाल, चना, साग-सब्जी जो कुछ मिलता था सब समेट लेता था और उसे गधे की तरह ढोने के काम पर बच्चों को लगा देता था। अब शिक्षक दिवस पर एसे गुरुओं की याद आने लगे तो, मैं क्या कर सकता हूं, सिवाये ब्लोगियाने के। कस्बा छूटा, शहर छूटा और नये शहर में गया। स्कूल क...

Most Read Posts

रामेश्वरम में

Bhairo Baba :Azamgarh ke

इति सिद्धम

Azamgarh : History, Culture and People

Maihar Yatra

विदेशी विद्वानों के संस्कृत प्रेम की गहन पड़ताल

...ये भी कोई तरीका है!

निज़ामाबाद और शीतला माता

पेड न्यूज क्या है?