Posts

Showing posts with the label अंतरराष्ट्रीय

मुझे तुमसे सहानुभूति है स्वीडन

Image
  इष्ट देव सांकृत्यायन भारत तो खैर , बहुत पुराना भुक्तभोगी है... लेकिन एक भारत ही है जो इतना पुराना भुक्तभोगी होकर भी आज तक संघर्षरत रहने की औकात में है। यूनान , मिस्र , रोमां सब मिट गए जहां से... यकीन मानिए ये सब मिट ही गए... वाकई मिट गए जहां से। आपके होने का अर्थ केवल आपका होना नहीं होता , अगर आप मनुष्य हैं तो। आपके होने का अर्थ है आपके वास्तविक इतिहास का होना , आपके लोक का होना.. अपनी सभी गाथाओं , गीतों , रीति-रिवाजों , पकवानों , पहनावों के साथ … आपके पूरे भूगोल का होना , आपकी अपनी अर्थव्यवस्था का होना... यानी आपकी संपूर्ण अस्मिता का अपनी संपूर्ण इयत्ता के साथ होना। और उतना ही सच यह भी है कि यदि आप मनुष्य हैं तो दूसरों को मिटाने के बारे में आप कभी नहीं सोच सकते। क्योंकि किसी को मिटाने की सोच ही किसी बहुत गहरी कभी न भरी जा सकने वाली हीनता ग्रंथि से आती है। एक ऐसी ग्रंथि से जो व्यक्ति को पहले ही यह मानने के लिए बाध्य कर चुकी होती है कि वह संसार का सबसे कायर , सबसे अयोग्य और सबसे अक्षम व्यक्ति है। अन्यथा एक मनुष्य ही है जिसे यह बात बहुत अच्छी तरह पता है कि प्रकृति ' केवल ...

Most Read Posts

रामेश्वरम में

Bhairo Baba :Azamgarh ke

इति सिद्धम

Azamgarh : History, Culture and People

Maihar Yatra

विदेशी विद्वानों के संस्कृत प्रेम की गहन पड़ताल

...ये भी कोई तरीका है!

निज़ामाबाद और शीतला माता

पेड न्यूज क्या है?