ज्योति और सचिन: खलनायक नहीं, नायक हैं ये
इष्ट देव सांकृत्यायन सचिन पायलट का प्रयास एक बार उलटा क्या पड़ा पूरे परिदृश्य पर वे खलनायक नजर आने लगे। गहलोत और दूसरे कांग्रेसियों से लेकर न्यूज चैनलों-अखबारों के छापदार विशेषज्ञों और सोशल मीडिया के छापेमार विशेषज्ञों तक ने उन्हें विभीषण से लेकर रावण और दुर्योधन से लेकर शकुनि तक साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ा। ठीक यही बात उस वक्त भी हुई थी जब पायलट के दहिनवार सिंधिया ने मध्य प्रदेश में तख्ता पलट किया था। सिंधिया अपने प्रयास में सफल हो गए तो अब उनके खिलाफ सारी आवाजें आनी बंद हो गईं। उस वक्त अमावस के नीरव अंधकार में दहाड़ते कांग्रेसी शेरों की हैसियत अब ज्योतिरादित्य के मामले में कीं कीं करते निरीह झींगुरों से अधिक नहीं रह गई है। अगर कहीं सिंधिया अगले चुनाव में जीत गए और भाजपा में अपने समर्थकों की संख्या बढ़ा सके तो इन झींगुरों में से आधों से ज्यादा का पिल्लों के रूप में पुनर्जन्म तो हम-आप दो साल बाद ही देख लेंगे। इसके लिए महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया को कोई बहुत ज्यादा कुछ करना नहीं है। उन्हें कुल जो करना है , वह बस इतना ही है कि महाराज के अपने साँचे से बाहर निकल आना है। ज्योतिरादित्...