‘समकालीन अभिव्यक्ति’ का संयुक्तांक ‘समकालीन अभिव्यक्ति’ का नया अंक (अंक 94-95, वर्ष- 23, अप्रैल-सितंबर, 2025) प्रकाशित होकर मध्य मार्च में आ गया था। कुछ अपरिहार्य कारणों से यह अंक पत्रिका की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया जा सका था। अंक की पीडीएफ़ लखकों-पाठकों को तत्काल प्रेषित कर दी गई थी। मुद्रित प्रतियाँ भी अप्रैल में आ गई थीं। कुछ लेखकों-सदस्यों को भेजी गई थीं, कुछ संभवत: रह गए थे। कुछ व्यवधान अपनी तरफ से थे और कुछ डाक विभाग के नए प्रेषण नियमों की तरफ से। जिन रचनाकारों को नहीं मिल पाई है, उन्हें भी मिल जाएगी। कुछ वर्षों से पत्रिका नियमित अंतराल पर नहीं निकल पा रही है, नियमित करने का प्रयास चल रहा है। संपादक मंडल का प्रयास रहता है कि विलंब भले हो जाए, किंतु रचनाओं का स्तर बना रहे। इस अंक में विभिन्न विधाओं में अधोलिखित रचनाकारों का सहयोग रहा है। संपादक मंडल रचनात्मक सहयोग के लिए आभारी है। लेख : डॉ. जीवन सिंह, राजेन्द्र सिंह गहलोत, योगेश डागर ललित निबंध : आद्या प्रसाद द्विवेदी कहानियाँ : सुभाष चंदर, पूजा अग्निहोत्री, अनिल पुरोहित, संदीप तोमर, राजा सिंह, नवल किशोर भट्ट लघुकथा : संजय...