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मायानगरी के सच का सच

बिली ग्राहम अमेरिकी इवैंजेलिस्ट थे. उनकी कुछ बातें ऐसी हैं जो सार्वकालिक और सार्वदेशिक महत्व की हैं. कहावत का रूप ले चुकी हैंं और दुनिया भर में कहावतों के रूप में ही जानी जाती हैं. ऐसी ही बातों में एक है: When wealth is lost, nothing is lost; when health is lost, something is lost; when character is lost, all is lost. बीते पाँच दशकों में बहुत कुछ उलट गया है. जैसे यह दुनिया को यह समझाया जाने लगा है कि सत्य और ईमानदारी जैसा कुछ होता ही नहीं है. आज वही ईमानदार है , जिसे बेईमानी का मौका नहीं मिला या जिसके पास बेईमानी करने का साहस या अक्ल नहीं है. हद्द है. बेईमानी को साहस और बेशर्मी - नंगई को बहादुरी से जोड़ा जाने लगा है. जाहिर है , ऐसे में चरित्र की स्थिति भी बदल चुकी है. झूठ बोलने वाले इतने करीने से बोलते हैं और वह भी पूरे जोर से शोर मचाकर कि सच उनके शोर के भार के तले तड़फड़ाकर मर ही जाता है. वसीम बरेलवी का शे ' र याद आता है: वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीके से मैं ए ' तिबार न करता तो और क्या करता. सिनेमा बहुत हद तक ऐसा ही करता है. वह कहता हमेशा अच्छे क...

अंडरवर्ल्ड से तिब्बती योग तक

कल बात गंगा की चली थी और वह भी उल्टी बहने वाली गंगा. सिनेमा की दुनिया में गंगा उल्टी ही बहती है. 80-90 के दशक में जो फिल्में बन रही थीं , एंग्री यंग मैन वाले जो रोल बहुत पसंद किए जा रहे थे और उसी नाते कुछ अभिनेताओं में लोग देवी-देवता देखने लगे थे , उनकी हकीकत शताब्दी के अंत तक आते-आते खुलने लगी थी. मजाक तो समझदार लोग तब भी उड़ाते थे और बोलते थे कि एक टिटहरी जैसा आदमी डॉन के अड्डे में घुसकर हथियारों से लैस उसके पचास मुश्टंडों को निबटा देता है , यह सिर्फ़ हिंदी सिनेमा में ही हो सकता है. और कहीं नहीं. तो उल्टी गंगा के क्रम में ही मुझे फिल्मी दुनिया की एक और गंगा याद आई. वही गंगा जो मैली हो गई थी. वह गई तो सीधी ही थी. जहाँ तक मुझे याद आता है वह निकली पहाड़ के किसी छोटे से गाँव से थी और अपने शेखचिल्ली टाइप प्रेमी के चक्कर में शादी-वादी करके एक बच्चे की माँ भी बन गई. पर उसका वह प्रेमी फिर गायब हो गया. लौट नहीं पाया समय से. पहली बात तो यह कि ऐसा भारत में कहीं होता नहीं. कुछ बेहद मजबूर या आपराधिक मनोवृत्ति वाले माता-पिता की बात छोड़ दें तो इस टाइप वाले माँ-बाप भारत में कहीं पाए नहीं ...

उल्टी गंगा बहाती फिल्में

गंगा गंगोत्री से निकलकर ऋषिकेश, हरिद्वार, गढ़मुक्तेश्वर, कानपुर, प्रयागराज, काशी, अजगैबीनाथ आदि होते हुए हावड़ा से आगे जाकर गंगा सागर में मिलती है क्या? नहीं न। असल में इसका उलटा है। असल में है क्या कि गंगा गंगासागर से निकलती है और भुवनेश्वर, हैदराबाद, चेन्नई, बंगलुरू, मुंबई, लाहौर, काबुल, मॉस्को आदि होते हुए आल्प्स की पहाड़ियों में कहीं मिल जाती है। अगर आप इस सच को स्वीकार कर सकते हैं तो जरूर देखें। फिल्में आपके लिए ही बनती हैं। अगर आप इस सच से आहत नहीं होते हैं, अगर आपके मन में इस सच पर कोई सवाल नहीं उठता, अगर आपके मन में सच और स्थापित तथ्यों को क्रिएटिविटी के नाम पर इस तरह विकृत किए जाने पर कोई पीड़ा नहीं होती, अगर आप गटर को बिस्लरी और बिसलरी को गटर मान सकते हैं तो साथी फिल्में जरूर, जरूर, जरूर देखें। फिल्में आपके लिए ही बनती हैं। आप ही हैं वो होनहार जिसके दम पर कई लाख करोड़ का धंधा चल रहा है। आप ही हैं वो महान आत्मा जिसके दम जिनके साथ बैठने में भी सभ्य व्यक्ति को शर्म आनी चाहिए उनके एक आटोग्राफ के लिए कुछ लोग कुत्ते से भी बदतर बनने को तैयार हैं। आप ही हैं वो विद्वाज्जन जि...

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