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जवाबी कार्रवाई अतिशीघ्र

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॥श्री गुरु चरण कमलेभ्यो नमः॥ सिकुलरिज्म को तो भारत में सिक मेंटलिटी माना ही जा चुका है और जो हर हाल में देश के दुश्मनों के ही साथ हैं , उनकी बात भी छोड़ दीजिए। इनके अलावा बात करें तो जैसा रोष पहलगाम हमले के बाद देखा जा रहा है , वह अभूतपूर्व है। मैंने अपने होश में कभी लोगों में ऐसा गुस्सा नहीं देखा। दिल्ली और उत्तर प्रदेश में आज कई जगहों पर लोगों ने प्रतीकात्मक रूप से स्वतःस्फूर्त दुकानें बंद रखीं। कैंडल मार्च निकाले गए और पाकिस्तान एवं आतंकवाद विरोधी नारेबाजी की गई। यह सारा क्रम मैंने उत्तर प्रदेश में तो कल भी देखा था। वही आज फिर। आमजन बहुत चीख-चीख कर बदले की कार्रवाई की माँग कर रहा है। और यह माँग बहुत जल्दी ही पूरी होने जा रही है। यह भी कह दूँ कि इस बार की कार्रवाई पिछली दोनों ही कार्रवाइयों से बिलकुल भिन्न होगी। दुनिया कल्पना नहीं कर सकती कि ऐसे भी की जा सकती है जवाबी कार्रवाई। मैं हमले के समय और एक मित्र के पूछने पर प्रश्न कुंडली दोनों के जरिये यह विश्लेषण कर चुका हूँ। जवाब का समय अत्यंत निकट है। यह कह देना भी जरूरी समझता हूँ कि यह कार्रवाई थोड़ी लंबी खिंचेगी। यह तब तक जाएगी जब ...

कोरोना के बाद की दुनिया - 1

इष्ट देव सांकृत्यायन  लॉक डाउन के एक महीने में हम भारतीयों के धैर्य , समझदारी , अपने या दूसरों के जीवन को लेकर हमारी गंभीरता और अर्थव्यवस्था के प्रति हमारे बड़े बड़े विशेषज्ञों की समझ सब कुछ सामने आ गया है। कोई यमुना तैर कर हरियाणा से यूपी तो कोई तरबूज - प्याज खरीदते बेचते मुंबई से प्रयागराज आ जा रहा है। किसी को पूजा के लिए जान की परवाह छोड़कर मंदिर जाना है तो किसी को नमाज अदा करने मस्जिद और गले भी मिलना है। कुछ लोगों को अपने स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति बताने तक से परहेज है और अगर चिकित्साकर्मी खबर मिलने पर जाँच के लिए उनके घर पहुँचें तो उन पर पत्थरबाजी भी करनी है। यह तो हद है कि बीमारों के इलाज के लिए चिकित्साकर्मियों को पुलिस लेकर जानी पड़े और पुलिस को उनके परिजनों-पड़ोसियों से पूरा संघर्ष करना पड़े। इतना ही नहीं , खुद को खतरे में डालकर लोगों के इलाज में जुटी नर्सों के सामने अश्लील हरकतें , सीढ़ियों की रेलिगों और अस्पताल की दीवारों तक पर थूक-लार लगाना , पेशाब-मल बोतलों में भरकर फेंकना , लोगों में संक्रमण फैलाने के इरादे से हैंडपाइप तक में मल डाल देना... निकृष्टतम सोच की सारी हदें पार ...

एक साहब बयानबहादुर और एक सपोर्टबहादुर

हाल ही में ओसामा जी की नृशंस हत्या के बाद अमेरिका ने दुनिया के सबसे शांतिप्रिय देश पाकिस्तान को धमकी दी कि ज़रूरत पड़ी तो वह पर फिर से ऐसी ही कार्रवाई कर सकता है. इसके बाद तो क्या कहने! कितना भी शांतिप्रिय हो, लेकिन कोई धमकी देगा तो कोई भी क्या करेगा. बहादुरी के मामले में पाकिस्तान का तो वैसे भी कोई जवाब नहीं रहा है. इतिहास गवाह है कि आमने-सामने की लड़ाई में वह कभी किसी से जीता नहीं है और छिपकर हमला करने का कोई मौक़ा उसने छोड़ा नहीं है. आप जानते ही हैं कि सामने आ जाए तो चूहे से आंख मिलाना वे अपनी तहजीब के ख़िलाफ़ समझते हैं और दूर निकल गए शेर पर तो पीछे से ऐसे गुर्राते हैं कि जर्मन शेफर्ड भी शर्मा जाए. तो अब जब अमेरिका उनके मिलिटरी बेस के दायरे में ही ओसामा जी की ज़िंदगी और विश्व समुदाय में उनकी इज़्ज़त की ऐसी-तैसी करके निकल गया तो वो गुर्राए हैं. यह संयोग ही है कि ओबेडिएंसी में टॉप भारत की आर्मी के प्रमुख ने भी ऐन मौक़े पर एक सही, लेकिन मार्मिक बयान दे दिया. वह भी बिना अपने हाइनेस से पूछे और इस बात का भी ज़िक्र किए बग़ैर कि ‘अगर उनकी इजाज़त हो तो’. यह जानते हुए भी कि उनकी इजाज़त के बग़ैर वे कुछ नहीं क...

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