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Showing posts from August, 2020

मुझे तुमसे सहानुभूति है स्वीडन

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  इष्ट देव सांकृत्यायन भारत तो खैर , बहुत पुराना भुक्तभोगी है... लेकिन एक भारत ही है जो इतना पुराना भुक्तभोगी होकर भी आज तक संघर्षरत रहने की औकात में है। यूनान , मिस्र , रोमां सब मिट गए जहां से... यकीन मानिए ये सब मिट ही गए... वाकई मिट गए जहां से। आपके होने का अर्थ केवल आपका होना नहीं होता , अगर आप मनुष्य हैं तो। आपके होने का अर्थ है आपके वास्तविक इतिहास का होना , आपके लोक का होना.. अपनी सभी गाथाओं , गीतों , रीति-रिवाजों , पकवानों , पहनावों के साथ … आपके पूरे भूगोल का होना , आपकी अपनी अर्थव्यवस्था का होना... यानी आपकी संपूर्ण अस्मिता का अपनी संपूर्ण इयत्ता के साथ होना। और उतना ही सच यह भी है कि यदि आप मनुष्य हैं तो दूसरों को मिटाने के बारे में आप कभी नहीं सोच सकते। क्योंकि किसी को मिटाने की सोच ही किसी बहुत गहरी कभी न भरी जा सकने वाली हीनता ग्रंथि से आती है। एक ऐसी ग्रंथि से जो व्यक्ति को पहले ही यह मानने के लिए बाध्य कर चुकी होती है कि वह संसार का सबसे कायर , सबसे अयोग्य और सबसे अक्षम व्यक्ति है। अन्यथा एक मनुष्य ही है जिसे यह बात बहुत अच्छी तरह पता है कि प्रकृति ' केवल '

हिंदी वालों का दंभ और समाज में उनकी भूमिका

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इष्ट देव सांकृत्यायन 60 के बाद की जो हिंदी है , दंभ से उसका चोली-दामन का साथ है। क्योंकि 47 में जो संविधान सभा के बहुमत के बावजूद हिंदी के राष्ट्रभाषा बनाए जाने का विरोध कर रहे थे और आखिरकार उसे अपने षड्यनत्रकारी दुष्चक्र में फँसाकर राजभाषा के दायरे में सीमित कर ही डाला , उन्होंने ही अपने उसी षड्यंत्र चातुर्य का उपयोग कर हिंदी की छाती पर अपने वर्चस्व का खूँटा गाड़ लिया। यह किस एक महापुरुष की कृपा का फल है , इस पर बार-बार बोलने का कोई लाभ नहीं। लेकिन जब बात समाज को बचाने में साहित्य की भूमिका की आएगी तो उन्हीं दंभियों में से कई अपनी वे कीलें ले-लेकर निकल आएंगे जो उन्होंने कभी हिंदी सेवा के नाम पर हिंदी भाषा , साहित्य और समाज के चक्के में ठोंकी थीं। उन्होंने वे कीलें ठोंकी तो थीं हिंदी के चक्के की हवा निकालने के लिए , लेकिन सहस्राब्दियों से वंचित समाज की अंतर्निहित चेतना ने उसका भी उपयोग कर लिया। वह उपयोग उसने अपनी मजबूती बढ़ाने में किया। आखिरकार गाड़ी और ज्यादा मजबूती से समय की सड़क पर जम गई और बेहवा ही चलने लगी । लढ़िये की तरह। लढ़िये की ये खासियत है कि वह ज़रा धीमे चलती है , लेकिन जब

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