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मंडोर से आगे

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हरिशंकर राढ़ी  ( गतांक से आगे ) वर्तमान समय में यह लगभग 82 एकड़ के उद्यान  क्षेत्र में फैला हुआ है। मंडोर उधान की यात्रा राजस्थानी संस्कृति  का साक्षात्कार कराने में सक्षम है।  उद्यान में प्रवेश करते ही वीरों की दालान (हॉल ऑफ़ हीरोज) के दर्शन  होते हैं जो एक ही चटटान को काटकर बनार्इ गर्इ है। 18वीं शताब्दी में निर्मित वीरों एवं देवताओं की दालान मारवाड़ी स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है।  उद्यान में एक संग्रहालय भी स्थापित है जिसमें तत्कालीन राजपरिवारों का इतिहास दर्शाया  गया है। इस संग्रहालय का सबसे आकर्शक पक्ष इसमें अनेक शास्त्रीय  राग-रागिनियों पर आधारित चित्रकला का प्रदर्शन  है। राग मालकोश , मधु-माधवी, आदि का विभिन्न भाव-भंगिमाओं एवं काल्पनिक परिसिथतियों के आधार पर अत्यंत भावनात्मक और कोमल चित्रांकन किया गया है। वीरों  का दालान    छाया :  हरिशंकर राढ़ी     जनाना महल के बाहर इकथंबा महल नामक एक मीनार है जो तीन मंजिली है। इसका निर्माण मह...

जहां वृक्ष ही देवता हैं

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हरिशंकर राढ़ी जब हमारा ऑटोरिक्शा  जोधपुर शहर  से बाहर निकला तो हमें कतई एहसास नहीं था कि जहां हम जा रहे हैं वह स्थान पर्यावरण का इकलौता तीर्थ होने की योग्यता रखता है। सदियों पहले जब पर्यावरण संरक्षण के नाम पर न कोई आंदोलन था और न कोई कार्यक्रम, तब वृक्षों के संरक्षण के लिए सैकडो़ं अनगढ़ और अनपढ़ लोगों ने यहां आत्मबलिदान कर दिया था। आत्माहुति का ऐसा केंद्र किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं हो सकता। लेकिन विडम्बना यह है कि पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर इतनी चिल्ल-पों मचने और पर्यटन के धुंआधार विकास के बावजूद यह स्थल अपनी दुर्दशा  पर रोने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहा है। इसे तो स्वप्न भी नहीं आता होगा कि देश  के पर्यटन मानचित्र में कभी इसका नाम भी आएगा ! खेजडली का शहीद स्मारक                                            छाया : हरिशंकर राढ़ी         राजस्थान के ऐतिहासिक शहर  जोधपुर से मात्र 25 किलोमीटर की दूरी पर प्र...

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