फागुन आया
इष्ट देव सांकृत्यायन महक रहे हैं बौर झूम रही अमवा की डारी फागुन आया. सांझ ढले सारे परहेजी निकल गए भौंराबारी कि फागुन आया. अनमन हैं कुछ मोती बाबा पलट रहे हैं पोथी. बिजई बाबू हफ्ते भर से सुलट रहे हैं धोती. इस्सर पीछे-पीछे हैं आगे निकल गई चुड़िहारी फागुन आया. सिरजन दही दिवाने हो गए हरिचन पूजें खोवा. सीरी पंडित एरोप्लेन से कल निकलेंगे गोवा. घर-घर रंग से भरी तनी चल रही पिचकारी फागुन आया. धान के कोठिल गेहूं भर दिए गेहूं कोठिल चना. गद्दी बैठे तो बेचैनी धर ली कुछ करते नहीं बना. कोदई साहू बिना अंगूठा लिए दे दिए उधारी फागुन आया. खेत का फीता खलिहान चढ़ गया खलिहान से नपी अबादी नंबर चढ़ गए तो मजबूरन करनी पड़ी नई अराजी छुनछुन सुन के इंतखाप दे दिए लछनलाल पटवारी - फागुन आया.