Posts

Showing posts with the label intellectuals

आपकी भूख का फुटबॉल

जिन राजनेताओं को लेकर आप बहुत गंभीर होते हैं , अपने दोस्तों-परिजनों से लेकर अजनबियों तक से भिड़ जाते हैं ; कभी ग़ौर किया है कि वे आपको लेकर कितने गंभीर हैं ? नहीं किया है तो अबसे करें. जब आप भूख से मरते हैं तो वे आपके मरने को मुद्दा बनाते हैं. और मुद्दा वे उसी चीज़ को बनाते हैं , जिसे भुना सकें. भुना सकें , यानी जिससे ख़ुद फ़ायदा उठा सकें. फ़ायदा उठा सकें यानी व्यापार कर सकें. तो वे आपके भूख से मरने का भी व्यापार करते हैं. और इस व्यापार में वे आपकी भूख को फुटबॉल बना लेते हैं. यानी एक आपकी भूख को लात मार कर दूसरे के पाले में फेंकता है. और फिर दूसरा भी उसके साथ यही सलूक करता है. सब यही कहते हैं -- नहीं नहीं , मेरे नहीं , उसके चलते हुई है तेरी मौत. तेरी भूख की वजह मैं नहीं बे , वो है. पूरी ईमानदारी से सभी यही करते हैं. वो भी जो आप पर रोज़ किरपा की बारिश करते रहते हैं. इतनी बारिश कि जितनी कोई बाबा भी न कर सके. और वो भी जो आपको दुनिया भर के पाठ पढ़ाते हैं. कोशिश सबकी यही है कि आप कभी इस लायक होने ही न पाएँ कि उनकी किरपा से बाहर निकल जाएँ. उनके होने का तो सारा मज़ा ही बस तभी त...

इन दरिंदों के रहते...

चेन्नै में कुल 18 दरिंदे 11 साल की एक बच्ची का सात माह तक यौन शोषण करते रहे. अभी यह बात आरोप के स्तर पर है. जाँच चल रही है , लेकिन अभी आरंभिक स्तर पर है. बात की किसी तरह पुष्टि नहीं हो पाई है. इसकी ख़बरें प्रायः सभी अख़बारों में हैं , लेकिन मेडिकल परीक्षण की बात कहीं नहीं है. जाहिर है , उसकी रिपोर्ट का अभी इंतज़ार होगा. आक्रोश से भरा मन भी कहता है कि काश यह सच न हो. लेकिन अगर हुआ तो ? और ज़्यादा आशंका इसी बात की है कि आरोप सच होगा. कोई क्यों ऐसे आरोप लगाएगा ?   आरोपियों में सब उसी अपार्टमेंट के लिफ्ट ऑपरेटर , सिक्योरिटी गार्ड , वॉटर सप्लायर आदि थे. मान लीजिए अगर ये भीड़ के हत्थे चढ़ जाते तो ? किसी हद तक हो सकता है कि आरोप ग़लत ही हो. फिर भी कल्पना करिए अगर ये भीड़ के हत्थे चढ़ जाते तो क्या होता ? कुछ लोग रेप और मॉब लिंचिंग जैसी जघन्य घटनाओं को भी जाति-धर्म के नज़रिये से ही देखते हैं. किसी जाति या संप्रदाय विशेष का व्यक्ति किसी दुर्घटना का शिकार हुआ तो उनकी संवेदना की बाँछें खिल जाती हैं. उन्हें उसमें अपने आकाओं का वोट बैंक जो दिखने लगता है. लेकिन अगर उसके विपरीत हुआ , यानी उसी ...

शर्म तुमको मगर नहीं आती

Image
गैंगरेप की घटना का विरोध करते लोग   बगलें मत झाँकिए. जब जम्मू में रेप की ख़बर आई तो फिल्मी दुनिया की बाई जी लोगों को बड़े ज़ोर से शर्म आने लगी थी. जिस शख्स की लोकेशन घटना के वक़्त हर तरह मुजफ्फरनगर साबित हो चुकी है, उसे रेपिस्ट बताकर प्रदर्शन किए गए. पीड़िता के नाम पर लाखों रुपये का चंदा बटोरा गया और उसमें घपला भी किया गया. उस घपले को लेकर बंदरबाँट की लड़ाई भी हुई और उसी से पीछे की पूरी कहानी पता चली. वह मंदिर जो चारों तरफ़ से खुला हुआ है, जहाँ हमेशा लोगों का आना-जाना लगा रहता है और तहखाना बनाने का कोई उपाय भी नहीं है, उसमें महान पत्रकार लोग तहखाना तलाश ले आए. इसके पीछे के कारणों का ज़िक्र करने की ज़रूरत नहीं है. अब तो वह लिस्ट भी सामने आ चुकी है, जिसमें उन महान पत्रकारों के नाम दर्ज हैं जिन्हें एक से डेढ़ लाख रुपये महीने की रकम कैंब्रिज एनलिटिका का ओर से केवल भारत विरोधी ख़बरें लिखने के लिए दी जा रही थी. अब इन्हें वह कहा जा रहा है, जो कहा जा रहा है, तो इसमें ग़लत क्या है? उस घटना के आरोपी को आरोपी कहने में लोगों को शर्म आ रही थी. उस आरोपी को जिसके बारे में हर तरह से साबित ...

Most Read Posts

रामेश्वरम में

Bhairo Baba :Azamgarh ke

इति सिद्धम

Azamgarh : History, Culture and People

Maihar Yatra

विदेशी विद्वानों के संस्कृत प्रेम की गहन पड़ताल

...ये भी कोई तरीका है!

निज़ामाबाद और शीतला माता

पेड न्यूज क्या है?