Posts

Showing posts with the label news

संवेदना के धागों से बुनी गई किताब है ‘जिंदगी का बोनस’

Image
अशोक चक्रधर ने किया सच्चिदानंद जोशी की पुस्तक का लोकार्पण नई दिल्ली।   प्रख्यात संस्कृतिकर्मी और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव   डा. सच्चिदानंद जोशी की रम्य रचनाओं की पुस्तक  ‘ जिंदगी का बोनस ’  का लोकार्पण इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में पद्श्री से अलंकृत प्रख्यात व्यंग्यकार अशोक चक्रधर ने किया। इस मौके पर पद्मश्री से सम्मानित नृत्यांगना शोभना नारायण , भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो.संजय द्विवेदी , कथाकार अल्पना मिश्र , प्रभात प्रकाशन के प्रभात कुमार विशेष रूप से उपस्थित थे। समारोह को संबोधित करते हुए आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो.संजय द्विवेदी ने कहा कि लेखक की सह्दयता ने जिंदगी की बहुत साधारण घटनाओं को  ‘ जिंदगी का बोनस ’  बना दिया है , यह किताब संवेदना के धागों से बुनी गई है। लेखक की यही संवेदना , आत्मीयता और आनंद की खोज इस पुस्तक का प्राणतत्व है। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि श्री जोशी बहुमुखी प्रतिभासंपन्न और सह्दय व्यक्ति हैं , उनके इन्हीं गुणों का विस्तार इन रम्य रचनाओं में दिखता है। इस संग्रह की एक रचना  ‘ इफ्तार ’  उनकी सं...

वैज्ञानिक दृष्टिकोण के लिए अपनी भाषा का विकास आवश्यक

नई दिल्ली। वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सीखने की प्रक्रिया के लिए , अपनी भाषा में ज्ञान होना और वैज्ञानिक तथा उचित रूप से अपनी भाषा का विकास करना आवश्यक है। ये विचार केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के हीरक जयंती समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम के मुख्यह अतिथि माननीय शिक्षा मंत्री श्री ' निशंक ' ने उदघाटन करते हुए शब्दावली आयोग परिवार को हीरक जंयती समारोह के उपलक्ष्यर में बधाई एवं शुभकामनाऍं दीं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग ने 60 साल की अपनी गौरवपूर्ण यात्रा में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण काम किया है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए श्री पोखरियाल ने हीरक जयंती समारोह के अवसर पर शब्दावली आयोग परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि 6 दशक की अपनी शानदार यात्रा के दौरान विज्ञान ,  इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी ,  कृषि और चिकित्सा विज्ञान सहित विभिन्न विषयों में 9 लाख से अधिक अंग्रेजी शब्दों के लिए वैज्ञानिक और त...

बयानों के आलोक में किसान आंदोलन

इष्ट देव सांकृत्यायन  सरकार को हजारों किसानों की लाशों से गुजरना होगा - ये बयान है राकेश टिकैत का, 26 जनवरी से पहले। सरकार ने गोली क्यों नहीं चलाई - ये सवाल है राकेश टिकैत का, 26 जनवरी की इंतहाई बेहूदगी के बाद। सोचिए, राकेश टिकैत और उनके जैसे लोग क्या कर रहे हैं और किनके साथ खड़े हैं।  वे राजनीति के चूल्हे पर अपनी रोटी सेंकने के लिए उन्हीं लोगों को लाशों में तब्दील करने पर तुले हैं जो किसी भ्रम, किसी मामूली लालच या किसी तरह के बहकावे में उनके साथ आ गए हैं। ये न सोचिए कि किसी के मरने के बाद वे किसी के काम आएंगे। न तो उन्हें किसी किसान से कुछ लेना-देना है और न उसके परिवार से। अगर किसान से उनका मतलब होता तो वे उन बिचौलियों से लड़ते जो किसान की पांच रुपये की उपज उपभोक्ता तक 30-40 रुपये में पहुंचाते हैं और बीच के 25-35 रुपये अपनी जेब के हवाले करते हैं। पैदा करने वाला किसान गरीब का गरीब रह जाता है। कर्ज से दबता चला जाता है। खरीदने वाला उपभोक्ता अलग कर्ज से दबता जाता है। जेब ढीली होने के चलते। बीच का बिचौलिया देखते-देखते अरबपति बन जाता है। राकेश टिकैत और उनके जैसे कई स्वयंभू नेता उन्ही...

बलवाइयों ने किया देश को शर्मसार!

कवि‍लाश मि‍श्र कानून व्‍यवस्‍था के मददेनजर पहले बैरिकेडिंग तोड़ी, डिवाइडर तोड़े, सुरक्षा को देखते हुए सड़कों पर खड़ी की गई बसों के शीशे फोड़े और इन सबके बाद जब पुलि‍स वालों ने रोकने की कोशि‍श की तो पुलि‍स वालों को जान से मारने की कोशि‍श की गई।  ट्रैक्टर से रौंदने की चेष्‍टा की गई। पुलि‍सवाले धैर्य बनाए बलवाइयों को समझा रहे थे तो उन्‍हें डंडों से पीटा जा रहा था। पुलि‍स को दौड़ाया जा रहा था। लालकि‍ला के पास बने नहर में कूद कर पुलि‍सवालों ने जान बचाई।  …और फि‍र आंदोलनारी कि‍सानों ने लालकि‍ला पर फहरा रहे ति‍रंगा को उतार कर एक धर्म वि‍शेष का झंडा फहराया ….। जाहि‍र है, यह तस्वीरें किसानों की नहीं लगती और न ही अकस्‍मात होता दिखा। दिल्ली को अशांत करना ही इनकी मंशा थी। बकायदा,  अपनी पहचान छुपाने के लि‍ए प्रदर्नकारियों ने गमछे से मुंह ढक रखा था। जाहिर है कि ये लोग पहले से ही मन बनाकर आए थे कि ऐसा करना है। दिल्ली पुलिस ने ट्रैक्टर परेड के लिए संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के साथ छह दौर की वार्ता के बाद तीन रूट तय किए थे। जि‍न कि‍सान नेताओं ने पुलि‍स को भरोसा दि‍या था कि‍ कि‍सान आंद...

देश को जोड़ने का काम करता है कम्युनिटी रेडियो : प्रो. द्विवेदी

Image
अंकुर विजयवर्गीय नई दिल्ली। '' भारत में 290 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन हैं , जिनकी पहुंच देश की लगभग 9 करोड़ आबादी तक है। ये रेडियो स्टेशन समुदायों द्वारा उनकी स्थानीय भाषा एवं बोली में चलाए जाते हैं। इस तरह भारतीय भाषाओं के माध्यम से कम्युनिटी रेडियो देश को जोड़ने का काम करता है। '' यह विचार भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने सोमवार को सरदार वल्लभभाई पटेल की 145वीं जयंती प्रसंग के मौके पर , ' कम्युनिटी रेडियो-सबका साथ सबका विकास ' विषय पर आयोजित वेबिनार में व्यक्त किए।   कार्यक्रम में वन वर्ल्ड फाउंडेशन के प्रबंध निदेशक श्री राजीव टिक्कू , रेडियो अल्फ़ाज़-ए-मेवात की प्रमुख श्रीमती पूजा ओबेरॉय मुरादा , कम्युनिटी मीडिया कंसल्टेंट डॉ. डी. रुक्मिणी वेमराजू एवं रेडियो बनस्थली राजस्थान के स्टेशन मैनेजर श्री लोकेश शर्मा भी वक्ता के तौर पर शामिल हुए। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि सामुदायिक रेडियो स्टेशन लोगों से उनकी भाषा में संचार करते हैं , जिससे न सिर्फ भाषा के बचाव में योगदान होता है , बल्कि अगली पीढ़ी तक उसका विस्तार भी होता है। एक ...

भारतीय भाषाओं को बचाने का समय : प्रो. द्विवेदी

Image
अंकुर विजयवर्गीय  नई दिल्ली । '' पूरे विश्व में लगभग 6000 भाषाओं के होने का अनुमान है। भाषाशास्त्रियों की भविष्यवाणी है कि 21 वीं सदी के अंत तक इनमें से केवल 200 भाषाएं जीवित बचेंगी और खत्म हो जाने वाली भाषाओं में भारत की सैकड़ों भाषाएं होंगी। '' यह विचार भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने मंगलवार को हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित की गई प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरण समारोह में व्यक्त किए। कार्यक्रम में संस्थान के अपर महानिदेशक श्री सतीश नम्बूदिरीपाद , प्रोफेसर आनंद प्रधान एवं भारतीय सूचना सेवा की पाठ्यक्रम निदेशक श्रीमती नवनीत कौर भी मौजूद थीं। समारोह में प्रो. द्विवेदी ने सभी विजेताओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। कोविड- 19 महामारी के संबंध में सरकार की ओर से जारी दिशानिर्देशों का अनुपालन करते हुए इस कार्यक्रम में केवल पुरस्कार विजेताओं को ही आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर प्रो. द्विवेदी ने कहा कि अगर आप भाषा विज्ञान के नजरिए से देखें , तो हिंदी एक पूर्ण भाषा है। हिंदी की देवनागरी लिपि पूर्णत: वैज्ञानिक है। हिंदी भाषा में ज...

आईआईएमसी प्रवेश परीक्षा के परिणाम अगले सप्ताह

नई दिल्ली। भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा 8 पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए रविवार को प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया। इस वर्ष प्रवेश परीक्षा को कराने की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को दी गई थी। यह पहला मौका है जब परीक्षा एनटीए द्वारा आयोजित करवाई गई है। इससे पूर्व आईआईएमसी द्वारा स्वयं परीक्षाओं का आयोजन किया जाता था। कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष प्रवेश परीक्षा ऑनलाइन आयोजित की गई। एनटीए द्वारा 4 बैचों में सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया। आईआईएमसी के 6 परिसरों में संचालित होने वाले 8 पाठ्यक्रमों की 476 सीटों के लिए इस वर्ष लगभग 4600 विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 3773 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए। प्रवेश परीक्षा का परिणाम अगले हफ्ते आईआईएमसी की वेबसाइट पर घोषित किया जाएगा। कोरोना महामारी की वजह से इस वर्ष सत्र नवंबर के पहले हफ्ते से शुरू होगा।

साहित्यिक कमी को पूरा करेगी अनुस्वार: प्रो. राजेश कुमार

Image
कामिनी मिश्र इंडिया नेटबुक्स प्रकाशन की नई पत्रिका अनुस्वार के आवरण का विमोचन करते हुए सुप्रसिद्ध साहित्यकार और समालोचक प्रोफ़ेसर राजेश कुमार ने कहा कि यह पत्रिका एक बहुत बड़े साहित्यिक वैक्यूम को पूरा करेगी। ऐसा इसलिए कि इस समय ऐसी स्तरीय पत्रिकाओं की बहुत कमी है जो साहित्य का विकास करते हुए पाठकों को रुचिपूर्ण और सार्थक साहित्य उपलब्ध करवा सकें। हर्ष का विषय है कि अनुस्वार पत्रिका रंगारंग पत्रिका होगी जिसमें सभी विधाओं की रोचक और श्रेष्ठ रचनाएं प्रकाशित होंगी और प्रतिष्ठित साहित्यकारों को स्थान दिया जाएगा। राजेश जी ने आगे कहा कि त्रैमासिक आधार पर प्रकाशित होने वाली है इस पत्रिका का पाठकों को पहले से ही प्रतीक्षा बढ़ गई है और आकर्षण का विषय बन चुकी है। सभी लोग इसका उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं। अनुस्वार पत्रिका के आवरण के लोकार्पण के अवसर पर साहित्य अकादेमी से सम्मानित साहित्यकार डॉ दिविक रमेश ने अपने संदेश में कहा कि आज जबकि साहित्य को स्थान देने वाली पत्रिकाएँ बंद हो गई हैं या बंद होने के कगार पर हैं तथा ऐसे कितने ही समाचार पत्रों के साहित्यिक पृष्ठ शुष्क हो चुके हैं , साहित्यि...

डिजिटल इंडिया पर लालित्य ललित की पैनी नज़र: प्रो.राजेश कुमार

Image
नई दिल्ली। नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में डॉ लालित्य ललित के ताज़ा व्यंग्य संग्रह डिजिटल इंडिया का लोकार्पण बुधवार को किया गया। यह व्यंग्य संग्रह गीतिका प्रकाशन की सुश्री गीता पंडित ने किया। इस अवसर पर व्यंग्य समालोचक व केंद्रीय हिंदी संस्थान के न्यासी सदस्य प्रो राजेश कुमार ने कहा- आज हमारी सारी दुनिया डिजिटल हो चुकी है. आज हम चाहे किसी से बात करने की सोचें , चाहे हम किसी खरीदारी करने की सोच है या हम किसी से कोई व्यवहार करने की बात सोचें या हम कोई व्यापार करने की बात सोचें या हम कोई आंदोलन करने की बात सोचें , हर जगह है डिजिटल दुनिया हावी है. डिजिटल दुनिया के माध्यम से हम गरीबों के लिए आंदोलन करते हैं , नेताओं के लिए समर्थन जताते हैं और और इसके साथ ही हम अपने दैनिक जीवन की रोजमर्रा की चीजें भी डिजिटल दुनिया के माध्यम से ही करते हैं. ऐसे में लेखक कैसे इस दुनिया से अलग हो सकता है. लालित्य ललित ने इस महत्वपूर्ण विषय पर अनेक कोणों से विचार किया है. चाहे वह मीडिया की दुनिया हो , चाहे वह सामाजिक मीडिया की दुनिया को , चाहे वह सामान्य रूप से हमें प्रभावित करने वाले डिजिटल दुनिया हो , उनकी कलम उ...

भाजसं: कोरोना के विरुद्ध सतर्क रहने की शपथ

Image
अंकुर विजयवर्गीय नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरोना के खिलाफ सतर्क रहने के लिए शुरू किए गए जन आंदोलन के तहत सोमवार को भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने जागरुक रहने की शपथ ली। इस मौके पर आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने सभी लोगों के साथ मिलकर ये संकल्प लिया कि वह कोराना के प्रसार को रोकने के लिए सभी आवश्यक सावधानियां बरतेंगे। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि हम एक साथ मिलकर ही कोविड- 19 के खिलाफ इस लड़ाई को जीत सकते हैं। कार्यक्रम में संस्थान के अपर महानिदेशक श्री सतीश नम्बूदिरीपाद , प्रो. आनंद प्रधान , प्रो. अनुभूति यादव , प्रो. सुनेत्रा सेन नारायण एवं श्रीमती नवनीत कौर भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री द्वारा गुरुवार को कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए इस जन आंदोलन की शुरुआत की गई थी। आगामी त्योहारों और सर्दियों के मौसम के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के पुनः खुलने के मद्देनजर यह अभियान शुरू किया गया है। इस जन आंदोलन के जरिए मास्क पहनने , दो गज की दूरी का पालन करने और लगातार हाथों की सफाई करने का संदेश दिया जाएगा।

ग्लोबल सिटीजन तैयार करेगी नई शिक्षा नीति : प्रो. द्विवेदी

अंकुर विजयवर्गीय  कोलकाता , 10 अक्टूबर । '' नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को अपनी परंपरा , संस्कृति और ज्ञान के आधार पर ' ग्लोबल सिटीजन ' बनाते हुये उन्हें भारतीयता की जड़ों से जोड़े रखने पर आधारित है। '' यह विचार भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने रविवार को भारतीय संस्कृति संसद , कोलकाता द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में व्यक्त किए। दो सत्रों में आयोजित इस संगोष्ठी के पहले सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने की। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल श्री केसरी नाथ त्रिपाठी भी विशिष्ट तौर पर उपस्थित थे। ' राष्ट्रीय शिक्षा नीति और आज का समय ' विषय पर मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए प्रो. द्विवेदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारपरक ज्ञान पर बल देती है , जिससे बच्चों के कंधे से बैग के बोझ को हल्का करते हुये उनको भावी जीवन के लिये तैयार किया जा सके। इसके अलावा वैदिक गणित , दर्शन और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को महत्त्व देने की कवायद भी नई शिक्षा नीति में की...

मामाजी ने मूल्यों को समझा था

Image
नई दिल्ली। प्रख्यात पत्रकार माणिकचंद्र वाजपेयी जी पर एकाग्र पुस्तक ‘ शब्दपुरुष : माणिकचंद्र वाजपेयी ’ का लोकार्पण बुधवार को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र , नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत एवं केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने किया। पुस्तक का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन एव कला केंद्र ने संयुक्त रूप से किया है। कार्यक्रम में हरियाणा के पूर्व राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी , वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय तथा प्रभात प्रकाशन के प्रबंध संपादक प्रभात कुमार भी मौजूद थे। ‘ शब्दपुरुष : माणिकचंद्र वाजपेयी ’ का लोकार्पण पुस्तक का संपादन इंदिरा कला केंद्र के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी और भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो.संजय द्विवेदी ने किया है। पुस्तक में ' मामाजी ' के नाम से प्रसिद्ध श्री माणिकचंद्र वाजपेयी जी के जीवन एवं पत्रकारिता पर लेखकों ने अपने विचार व्यक्त किये हैं। इसके अलावा ' मामाजी ' के द्वारा लिखे गए चुनिंदा लेखों का संकलन भी इस किताब में है। इस संबंध में डा. सच्चिदानंद जोशी ने बताया कि श्री म...

Most Read Posts

रामेश्वरम में

Bhairo Baba :Azamgarh ke

इति सिद्धम

Azamgarh : History, Culture and People

Maihar Yatra

विदेशी विद्वानों के संस्कृत प्रेम की गहन पड़ताल

...ये भी कोई तरीका है!

निज़ामाबाद और शीतला माता

पेड न्यूज क्या है?