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राहु के दो मूल

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भौतिक दृष्टि से देखें तो अव्वल तो राहु हैं ही नहीं। वह जो हैं , वो एक बिंदु हैं। केवल फलित ज्योतिष ही उन्हें ग्रह मानता है और वह भी छाया ग्रह। क्योंकि इनके पास ठोस खगोलीय शरीर नहीं है। विज्ञान के अनुसार वह केवल एक बिंदु हैं। खगोल विज्ञान के अनुसार , राहु वह Intersection Point हैं , जहाँ पृथ्वी की कक्षा और चंद्रमा की कक्षा आपस में एक दूसरे को काटती है। ऐसे दो बिंदु हैं। एक उत्तर और दूसरा दक्षिण में। उत्तरी बिंदु को राहु और दक्षिणी बिंदु को केतु कहा जाता है। पौराणिक कथा तो आप जानते ही हैं कि स्वरभानु नामक राक्षस का सिर राहु है और धड़ केतु। फलित ज्योतिष में राहु और केतु दोनों ही की बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका है। पता नहीं क्या कारण है कि राहु को तो बहुत लोग अपने नाम में रखते हैं , लेकिन केतु को बिरला ही कोई रखता है। मेरे परिचितों में केवल एक हैं , जिन्हें माता-पिता की ओर से तो रणविजय सिंह नाम मिला , लेकिन केतु को उन्होंने स्वयं अपने नाम में जोड़ लिया - सत्यकेतु – तखल्लुस के रूप में। यह तखल्लुस उन्होंने क्या सोचकर जोड़ा , ये मैंने कभी पूछा नहीं। बहरहाल , आज हम राहु-केतु का ज्योतिषीय नहीं , बल्...

त्रासद विभ्रम का दौर

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  इष्ट देव सांकृत्यायन  ॥श्री गुरुचरण कमलेभ्यो नमः॥ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से लोगों को लगा होगा कि अब बवाल थम जाएगा। कॉक्रोच अलग प्रसन्न हुए कि वे सरकार से कुछ भी करवा सकते हैं। सरकार ने उस समय राहत की साँस ली कि उसने बला टाल दी। सरकारी लोग इसे मास्टर स्ट्रोक बताने में लग गए। लेकिन यह एक ऐसा भ्रम साबित हुआ , जिसका आज तक कोई जोड़ नहीं हुआ। यह भ्रम केवल सरकार ही नहीं , तथाकथित आंदोलनकारियों , अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और आम जनता सबके लिए होगा। ग्रहस्थितियाँ ही ऐसी हैं कि पूरी दुनिया भ्रमित है और अभी देर तक रहेगी। हालाँकि एक-एक कर सारा भ्रम छँटेगा। ऐसे-ऐसे रहस्य सामने आएंगे , और ऐसे-ऐसे भ्रम छँटेंगे कि आश्चर्य को भी आश्चर्य होगा। आने वाला समय न केवल भारत , बल्कि पूरी दुनिया के लिए भयावह है। प्राकृतिक दुर्घटनाएँ , असंतोष , जन विद्रोह और सांप्रदायिक दंगे... यह सब दिखाई दे रहे हैं। अराजक तत्त्वों का अहंकार चरम पर होगा और सरकार जितना बैकफुट पर आती जाएगी , उनका यह अहंकार उतना ही प्रबल होता चला जाएगा। इस पूरे उपक्रम से शेयर बाजार भी बहुत बुरी तरह प्रभावित होगा। विश्व बाजार एक बार...

इतना भी अशुभ नहीं होगा ग्रहण

  इष्ट देव सांकृत्यायन   ॥श्री गुरु चरण कमलेभ्यो नमः॥ यद्येकस्मिन् मासे ग्रहणं रविसोमयोस्तदा क्षितिपाः। स्वबलक्षोभैः संक्षयमायांत्यतित्यतिशस्त्रकोपश्च॥ अर्थात यदि एक ही मास में सूर्य और चंद्र दोनों का ग्रहण हो तो अपनी-अपनी सेनाओं में हलचल मच जाने से या शस्त्रप्रहार से राजाओं का नाश होता है।   यह महर्षि वराहमिहिर कृत बृहत्संहिता के राहुचाराध्यायः का 26वाँ श्लोक है। कल एक मित्र ने बताया कि कोई दैवज्ञ ऐसा कह रहे हैं कि देश की सेनाओं में हलचल मच जाएगी। युद्ध तो होगा ही होगा , सरकार भी पलट जाएगी। मैंने दैवज्ञ जी को सुनने की जरूरत नहीं समझी। कौन सुने और क्यों ही सुने! आजकल सोशल मीडिया पर दैवज्ञ लोगों की बाढ़ हुई है। 56 साल के युवा नेता वाले देश में 20-30 साल के व्यापारधर्मा विद्वान अपने को खुद ही सद्गुरुदेव कह रहे हैं , जिन्हें कभी किसी सद्गुरु का दर्शन तक नहीं हुआ और रोज विज्ञापन पर विज्ञापन और व्हाट्सएप दर व्हाट्सएप ठेले जा रहे हैं कि बस हमसे अभिये मोक्ष की दीक्षा ले लो , नहीं तो टेम बीता जा रहा है। ऐसे ही कोई दैवज्ञ रहे होंगे और कहीं किसी अपने को पोलिटिकल कहने वाले गि...

शनि राहु युति के परिणाम

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इष्ट देव सांकृत्यायन   श्री गुरुचरणकमलेभ्यो नमः   आज 29 मार्च से शनि भी वहीं आ जाएंगे जहाँ राहु , बुध , शुक्र , सूर्य , चंद्र और नेप्चून पहले से बैठे हैं। शनि तो आज 29 मार्च की रात 10.07 बजे मीन राशि में आएंगे , इसके पहले ही आज ही शाम 4 बजकर 47 मिनट पर चंद्रमा भी वहीं पहुँच गए हैं। इस तरह देखें तो षड्ग्रही नहीं सप्तग्रही योग बन रहा है। षड्ग्रही योग कोई ऐसी घटना नहीं है जो दस-बीस सहस्राब्दियों में एक बार बनती हो। यह हर दो-तीन दशक में एक बार बन जाती है। निश्चित रूप से इसमें कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाएँ होती हैं , लेकिन ऐसा नहीं है कि इससे कोई महाप्रलय हो जाए , जैसा कि आजकल ज्योतिष के नाम पर कुछ लोग बता रहे हैं। इस पर विस्तृत चर्चा फिर कभी। अभी मैं केवल उस युति की बात करने जा रहा हूँ जिसे लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने अजब-गजब बातें फैला दी हैं और ज्योतिष को थोड़ा-बहुत जानने और एक विद्या के रूप में इसमें आस्था रखने वाले लोग आशंकाओं के शिकार हो गए हैं।   खासकर आज ही से शुरू होने जा रही अन्य ग्रहों के साथ राहु-शनि की युति को लेकर कुछ लोग बड़ी भयावह बातें कर रहे...

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