रति का अध्यात्म: खजुराहो
हरिशंकर राढ़ी कंदरिया महादेव मंदिर छाया : हरिशंकर राढ़ी यदि किसी को धरती पर कामक्रीडा का सौंदर्य ] वैचारिक खुलापन, शारीरिक सुंदरता के प्रतिमान तथा कलात्मक जीवंतता एक साथ देखनी हो तो उसे खजुराहो की धरती पर एक बार जरूर आना चाहिए। ऐसे मंदिर शायद ही कहीं और हों जहां गर्भगृह में ईश्वरीय सत्ता के दूत ] हिंदू मान्यता के कल्याणकारी देव विराजमान हों और दीवारों पर सृश्टि की सुंदरतम रचना नारी के लावण्यमयी अंगों का पुरुष संसर्ग में अनावृत्त चित्रण हो। आज से लगभग एक हजार साल पहले प्रेम, सौंदर्य और संभोग की पूजा करने वाला समाज हमारे इस तथाकथित विकसित समाज से कितना आगे और वैज्ञानिक सोच वाला था ] इसका अंदाज खजुराहो की धरती पर फैली विशाल मंदिर शृंखला को देखकर सहज ही हो जाता है। चरित्र, वासना और गोपनीयता के नाम पर मनुष्य अपनी नैसर्गिकता और तार्किक सोच से कितना दूर हो गया है, इसका अनुमान यहीं लगाया जा सकता है। ऐसा भी नहीं है कि आज भी खजुराहो जाने वाला हर भारतीय पर्यटक इन कामक्रीडारत मूर्तियों को देखकर बहुत सहज महसूस करता है या इसे एक...