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  समीक्षा अन्वेषक : सत्य के अन्वेषण को प्रस्तुत करता नाटक -हरिशंकर राढ़ी नाटक और काव्य साहित्य की प्राचीनतम विधाएँ हैं, विशेषकर समस्त क्लासिकल भाषाओं में इनका साहित्यशास्त्र एवं विश्वप्रसिद्ध कृतियाँ प्रचुर मात्रा में मिलती हैं। जहाँ पाश्चात्य जगत में अरस्तू जैसे विद्वान ने अपनी कृति ‘द पोयटिक्स‘ में नाटकों एवं महाकाव्यों के मानक निर्धारित किए हैं, वहीं संस्कृत में अनेक साहित्य शास्त्रियों ने नाटकों पर विस्तृत चर्चा की है। संस्कृत में तो यहाँ तक कहा गया है कि काव्येषु नाटकं रम्यम्। नाटकों को सर्वोपरि इसलिए रखा गया है क्योंकि Hari Shanker Rarhi यह दृश्य-श्रव्य विधा है और दृश्य विधा का प्रभाव सर्वोपरि होता है। विभिन्न आकार-प्रकार एवं विषयवस्तु के नाटकों का लेखन मानवीय सभ्यता के समय से ही चला आ रहा है। हिंदी में भी नाटकों की परंपरा समृद्ध होती रही है, हालाँकि टीवी और फिल्मों के आने के बाद इनके स्वरूप, प्रकार, माँग एवं दर्शकवर्ग में व्यापक परिवर्तन आया है। वर्तमान में हिंदी साहित्य में अच्छे नाट...

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