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Yatra Manual

 व्यंग्य                       यात्रा मैनुअल                                                                             -हरिशंकर  राढ़ी (यह व्यंग्य ‘जागरण सखी’ में प्रकाशित  हो चुका है)        अगर मैं महान दार्शनिकों  और धर्माचार्यों द्वारा स्थापित इस मत को नकार भी दूं कि जीवन एक यात्रा है, तब भी आज की यात्राओं की लंबाई और यात्रियों की संख्या अकूत रह जाएगी। उद्योगी पुरुषों  द्वारा परंपरागत उद्योगों को दरकिनार करके नए-नए उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं। शिक्षा  उद्योग, धर्म उद्योग, प्रवचन उद्योग, वासना उद्योग, रोग उद्योग, फिल्म उद्योग, टीवी उद्योग के साथ-साथ पर्यटन उद्योग खूब विकसित हुआ है। यात्राओं की भरमार हो गई। यात्रावृत्तांतों से साहित्य और इंटरनेट को भर दिया गया। यात...

चेहरा-विहीन कवि नहीं हैं दिविक रमेश : केदार

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कविता संग्रह 'गेहूं घर आया है' का दिल्ली में लोकार्पण ‘आधुनिक हिंदी कविता में दिविक रमेश का एक पृथक चेहरा है. यह चेहरा-विहीन कवि नहीं है बल्कि भीड़ में भी पहचाना जाने वाला कवि है. यह संकलन परिपक्व कवि का परिपक्व संकलन है और इसमें कम से कम 15-20 ऐसी कविताएँ हैं जिनसे हिंदी कविता समृद्ध होती है. इनकी कविताओं का हरियाणवी रंग एकदम अपना और विशिष्ट है. शमशेर और त्रिलोचन पर लिखी कविताएं विलक्षण हैं. दिविक रमेश मेरे आत्मीय और पसन्द के कवि हैं.’ ये उद्गार प्रसिद्ध कवि केदारनाथ सिंह ने किताबघर प्रकाशन से सद्य: प्रकाशित कवि दिविक रमेश के कविता-संग्रह ‘ गेहूँ घर आया है ’ के लोकार्पण के अवसर पर कहे। विशिष्ट अतिथि केदारनाथ सिंह ने इस संग्रह को रेखांकित करने और याद करने योग्य माना. कविताओं की भाषा को महत्वपूर्ण मानते हुए उन्होंने कहा कि दिविक ने कितने ही ऐसे शब्द हिंदी को दिए हैं जो हिंदी में पहली बार प्रयोग हुए हैं. उन्होंने अपनी बहुत ही प्रिय कविताओं में से ‘पंख’ और ‘पुण्य के काम आए’ का पाठ भी किया. इस संग्रह का लोकर्पण प्रोफेसर नामवर सिंह , प्रोफेसर केदारनाथ सिंह और प्रोफे...

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