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हिंदी वालों का दंभ और समाज में उनकी भूमिका

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इष्ट देव सांकृत्यायन 60 के बाद की जो हिंदी है , दंभ से उसका चोली-दामन का साथ है। क्योंकि 47 में जो संविधान सभा के बहुमत के बावजूद हिंदी के राष्ट्रभाषा बनाए जाने का विरोध कर रहे थे और आखिरकार उसे अपने षड्यनत्रकारी दुष्चक्र में फँसाकर राजभाषा के दायरे में सीमित कर ही डाला , उन्होंने ही अपने उसी षड्यंत्र चातुर्य का उपयोग कर हिंदी की छाती पर अपने वर्चस्व का खूँटा गाड़ लिया। यह किस एक महापुरुष की कृपा का फल है , इस पर बार-बार बोलने का कोई लाभ नहीं। लेकिन जब बात समाज को बचाने में साहित्य की भूमिका की आएगी तो उन्हीं दंभियों में से कई अपनी वे कीलें ले-लेकर निकल आएंगे जो उन्होंने कभी हिंदी सेवा के नाम पर हिंदी भाषा , साहित्य और समाज के चक्के में ठोंकी थीं। उन्होंने वे कीलें ठोंकी तो थीं हिंदी के चक्के की हवा निकालने के लिए , लेकिन सहस्राब्दियों से वंचित समाज की अंतर्निहित चेतना ने उसका भी उपयोग कर लिया। वह उपयोग उसने अपनी मजबूती बढ़ाने में किया। आखिरकार गाड़ी और ज्यादा मजबूती से समय की सड़क पर जम गई और बेहवा ही चलने लगी । लढ़िये की तरह। लढ़िये की ये खासियत है कि वह ज़रा धीमे चलती है , लेकिन जब...

मेरी चीन यात्रा - 3

कृपया यहाँ चटका लगाएं: इस यात्रा वृत्तांत की पहली और दूसरी किस्त   पढ़ने के लिए डॉ. अरविंद मिश्र   चेंगडू (चीन) के लिये इन्डिगो का विमान रात दस बजे उड़ने को तैयार था। यह लगभग चार घंटे की उड़ान के बाद चेंगडू सुबह चार बजे पहुंचने वाला था। दरअसल चेंगडू और नई दिल्ली के वक्त में ढाई घंटे का फर्क है। मतलब यहां जब रात के दो बजते तो चेंगडू में सुबह का साढ़े चार होता। सही समय पर विमान उड़ चला। अभी यही कोई बीस पचीस मिनट हुए थे कि एकदम आगे की दाहिनी ओर की सीट पर कुछ हलचल सी होने लगी। एक गगन परिचारिका वहां पहुंच कर सिचुयेशन समझने की कोशिश कर रही थी। और पीछे की कुर्सियों पर के लोग उचक-उचक अपनी जिज्ञासा दूर करने के उपक्रम कर रहे थे। मुझे कुछ अनहोनी की आशंका बल्कि यों कहिए कुछ अशुभ लक्षण का आभास होने लगा। अब परिचारिका एक मिनी आक्सीजन सिलेंडर दौड़ के लाई और संभवतः उस यात्री को आक्सीजन देने लगी। मेरी सीट की छठवीं कतार थी इसलिए कुछ खास समझ में तो आ नहीं रहा था मगर गतिविधियां किसी गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर रहीं थीं। अब पूरा विमान परिचारक स्टाफ स्थिति को संभालने में जुट गया था। ...

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