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IAF STRIKES @ 0328 hours: A Clear picture of air strike

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Vinay Kumar  New Delhi: More than a year has passed since Indian Air Force (IAF) carried out Balakot air strikes across the border in Pak occupied Kashmir (PoK) on February 26, the first such strike across the border in nearly 50 years. Air strikes to dismantle terrorist camps in Balakot evoked a keen interest not only among the people but also showcased India’s air power and the capability of IAF. Reports in print and electronic media in the country came up with their accounts of the air strike on the basis of whatever was put out by the government at that time. Two senior defence journalists Mukesh Kaushik and Sanjay Singh have put together graphic and authentic account of Balakot air strike of   February 26, 2019   which were taken up in the wake of Pulwama terror attack by Pak-supported terror outfits on CRPF convoy in which 40 para-military personnel lost their lives. The author duo came up with ``IAF Strikes @0328 hours’’ which has a foreword penned by Air Marshal (...

हिंदी का प्रथम पशु चरित्र केंद्रित उपन्यास 'रीफ'

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भारती पाठक   [ इस कालम के अंतर्गत मैं एक पाठक की हैसियत से किताब को आपके साथ पढ़ने और पढ़े हुए को शेयर करने का प्रयास करती हूं । हम सभी जानते हैं कि आज हिंदी जगत में इतनी खेमेबंदी हो चुकी है कि किताब का पठन-पाठन छूट गया है, बस उन पर अपने वैचारिक फ्रेम से फतवेबाजी अधिक की जाती है । इससे पाठक दिग्भ्रमित हो जाते हैं और स्वतंत्र रूप से पुस्तक में लिखे का न तो अध्ययन कर पाते हैं, न आनंद ले पाते हैं । इसलिए मेरी तो कोशिश है कि पुस्तक में क्या है, यही सार संक्षेप में आपके सामने रखूं, अच्छा-बुरा तो आप जानें।] कुछ दिन पहले ही मिले इस छोटे से उपन्यास को पढना शुरू किया तो ख़त्म किये बिना रोक नहीं पाई खुद को और उसके बाद पूरी रात स्मृतियों को टटोलते अजीब सी बेचैनी में कटी । सच है कभी-कभी जीव-जंतु भी परिवार के सदस्यों की भाँति हृदय में अपने प्रेम और स्नेह की जड़ें इतनी गहरी जमा लेते हैं कि जीवन उनके ही इर्द-गिर्द मंडराता रहता है और अपने जाने पर वे ऐसा खालीपन दे जाते हैं जिसे भरने की कोई युक्ति नहीं सूझती क्योंकि उनका स्थान कोई नहीं ले सकता। यह कहना जरूरी है कि हमारा समय कुल मिलाकर मनुष्य और मान...

दास्तान- ए- बेदिल दिल्ली

पुस्तक समीक्षा दास्तान- ए- बेदिल दिल्ली संभवतः बहुत कम ही साहित्यप्रेमियों को इस बात की जानकारी होगी कि लब्धप्रतिष्ठ उपन्यासकार द्रोणवीर कोहली , पिछली सदी के उत्तरार्द्ध में प्रकाशित होने वाली अत्यंत लोकप्रिय पत्रिका धर्मयुग में ‘ बुनियाद अली ’ के छद्म नाम से एक स्तंभ लिखा करते थे , जिसका शीर्षक था - बेदिल दिल्ली। धर्मयुग पत्रिका के सर्वाधिक पढे जाने वाले और चर्चित स्तंभों में सम्मिलित बेदिल दिल्ली के अन्तर्गत लिखे गए उन्हीं लेखों को संकलित कर पुस्तकाकार में किताबघर प्रकाशन ने हाल में ही प्रकाशित किया है । कहने की जरूरत नहीं कि पुस्तक में संकलित सभी 52 लेख ऐतिहासिक महत्व के हैं। इनके माध्यम से लेखक ने तत्कालीन दिल्ली की सामाजिक, राजनीतिक और साहित्यिक दशाओं का चित्रण पूरी प्रामाणिकता के साथ किया है। दिल्ली स्थित सरकारी महकमों में फैला भ्रष्टाचार हो या सामाजिक स्तर पर पसरी संवेदनहीनता, साहित्यिक गलियारों में होने वाली आपसी टाँग खिचाई हो या फिर राजनीतिक मठाधीशों की छद्म सदाचारिता , हर जगह व्याप्त विसंगति को उकेर कर पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने के ...

चार रंग जिंदगी के

पुस्तक समीक्षा चार रंग जिंदगी के अपने जीवन के उत्तरार्द्ध में सर्जनात्मक लेखन से जुडने वाली रचनाकार डाॅ अरुणा सीतेश ने बहुत कम समय में ही तत्कालीन कथा-लेखिकाओं के बीच अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर ली थी। उनके कथा- साहित्य के केंद्र में प्रायः स्त्री जीवन की गहन भावनाओं का मार्मिक चित्रण उपस्थित रहता है। कुछ समय पूर्व प्रकाशित कथा संकलन ‘ चार लंबी कहानियां ’ में सम्मिलित उनके द्वारा लिखी गई कहानियां जहां एक ओर नारी मन के अंतद्र्वंद्व को उजागर करती हैं तो साथ ही मानवीय मनोविज्ञान का विश्लेषण भी करती हैं। समीक्ष्य संग्रह में संकलित पहली कहानी ‘डूबता हुआ सूरज’ एक असफल प्रेम की मार्मिक गाथा को बयान करती है। आत्मकथात्मक शैली में लिखी गई यह कहानी यद्यपि चिर- परिचित कथानक पर ही आधारित है , लेकिन इसका शिल्प और मनोभावों को पूरी सशक्तता से व्यक्त करने के लिए गढे गए वाक्य विन्यास , पाठकों को बांध कर रखने में पूर्णतः सक्षम हैं। भावुक इंसान के जीवन की मुश्किलें तब और बढ जाती हैं , जब उस पर अपने ही परिजनों और जीवन को व्यावहारिकता से देखने वालों का दबाव पडने लगता है। बुद्धिजनित तर्कों...

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