नए स्वर में आज की हिंदी कविता
हिन्दी जगत के प्रतिष्ठित प्रकाशन समूह किताबघर की ओर से आई कवि ने कहा - कविता श्रृंखला की यह समीक्षा युवा रचनाधर्मी विज्ञान भूषण ने की है इकट्ठे दस किताबों पर यह समीक्षात्मक टिप्पणी लम्बी ज़रूर है , पर मेरा ख़याल है की इससे सरासर तौर पर भी होकर गुज़रना आपके लिए भी एक दिलचस्प अनुभव होगा : हमारी भौतिकतावादी जीवन”ौली और आडंबरों के कपाट में स्वयं को संकुचित रखने की मनोवृत्ति ने हमारी संवेदनाओं को मिटाने का ऐसा कुचक्र रचा है जिससे बचकर निकलना लगभग असंभव सा दिखता है। आज के कठिन समय में आदमी के भीतर का ‘ आदमीपन’ ही कहीं गुम होता जा रहा।है. इससे भी बड़ी हतप्रभ करने वाली बात यह है कि हम अपने भीतर लगातार पिघलते जा रहे आदमीयत को मिटते हुए देख तो रहें हैं पर उसे बचाने के लिए कोई भी सार्थक प्रयास नहीं करते हैं या यद ऐसा कुछ करना ही नहीं चाहते हैं।ऐसे प्रतिकूल समय के ताप से झुलसते आम आदमी की हता”ा होती जा रही जिजीवि’ाा को संरक्षित रखते हुए संघर्’ा में बने रहने की क्षमता सिर्फ साहित्य ही प्रदान कर सकता है। कुछ समय पूर्व किताबघर प्रका”ान ने वर्तमान दौर के कुछ महत्वपूर्ण कवियों की चुनी हुई कविताओं की श्र...