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नए स्वर में आज की हिंदी कविता

हिन्दी जगत के प्रतिष्ठित प्रकाशन समूह किताबघर की ओर से आई कवि ने कहा - कविता श्रृंखला की यह समीक्षा युवा रचनाधर्मी विज्ञान भूषण ने की है इकट्ठे दस किताबों पर यह समीक्षात्मक टिप्पणी लम्बी ज़रूर है , पर मेरा ख़याल है की इससे सरासर तौर पर भी होकर गुज़रना आपके लिए भी एक दिलचस्प अनुभव होगा : हमारी भौतिकतावादी जीवन”ौली और आडंबरों के कपाट में स्वयं को संकुचित रखने की मनोवृत्ति ने हमारी संवेदनाओं को मिटाने का ऐसा कुचक्र रचा है जिससे बचकर निकलना लगभग असंभव सा दिखता है। आज के कठिन समय में आदमी के भीतर का ‘ आदमीपन’ ही कहीं गुम होता जा रहा।है. इससे भी बड़ी हतप्रभ करने वाली बात यह है कि हम अपने भीतर लगातार पिघलते जा रहे आदमीयत को मिटते हुए देख तो रहें हैं पर उसे बचाने के लिए कोई भी सार्थक प्रयास नहीं करते हैं या यद ऐसा कुछ करना ही नहीं चाहते हैं।ऐसे प्रतिकूल समय के ताप से झुलसते आम आदमी की हता”ा होती जा रही जिजीवि’ाा को संरक्षित रखते हुए संघर्’ा में बने रहने की क्षमता सिर्फ साहित्य ही प्रदान कर सकता है। कुछ समय पूर्व किताबघर प्रका”ान ने वर्तमान दौर के कुछ महत्वपूर्ण कवियों की चुनी हुई कविताओं की श्र...

स्कूप से कम नहीं रामकहानी सीताराम

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सत्येन्द्र प्रताप मधुकर उपाध्याय की 'राम कहानी सीताराम' एक ऐसे सिपाही की आत्मकथा है जिसने ब्रिटिश हुकूमत की ४८ साल तक सेवा की. अंगऱेजी हुकूमत का विस्तार देखा और आपस में लड़ती स्थानीय रियासतों का पराभव. सिपाही से सूबेदार बने सीताराम ने अपनी आत्मकथा अवधी मूल में सन १८६० के आसपास लिखी थी जिसमें उसने तत्कालीन समाज, अपनी समझ के मुताबिक़ अंग्रेजों की विस्तार नीति, ठगी प्रथा, अफगान युद्ध और १८५७ के गदर के बारे में लिखा है. अवधी में लिखी गई आत्मकथा का अंग्रेजी में अनुवाद एक ब्रिटिश अधिकारी जेम्स नारगेट ने किया और १८६३ में प्रकाशित कराया. अंग्रेजी में लिखी गई पुस्तक फ्राम सिपाय टु सूबेदार के पहले सीताराम की अवधी में लिखी गई आत्मकथा इस मायने में महत्वपूर्ण है कि गद्य साहित्य में आत्मकथा है जो भारतीय लेखन में उस जमाने के लिहाज से नई विधा है. सीताराम ने अपनी किताब की शुरुआत उस समय से की है जब वह अंग्रेजों की फौज में काम करने वाले अपने मामा के आभामंडल से प्रभावित होकर सेना में शािमल हुआ। फैजाबाद के तिलोई गांव में जन्मे सीताराम ने सेना में शामिल होने की इच्छा से लेकर सूबेदार के रूप में पें...

दमन का दौर और ईरान में मानवाधिकार

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सत्येन्द्र प्रताप नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित शीरीन ऐबादी ने आजदेह मोआवेनी के साथ मिलकर "आज का इरान - क्रान्ति और आशा की दास्तान" नामक पुस्तक मे इरान के चार शासन कालों का वर्णन किया है . शीरीन ने ईरान में शासन के विभिन्न दौर देखे हैं।वास्तव में यह पुस्तव उनकी आत्मकथा है, जिसने महिला स्वतंत्रता के साथ ईरान के शासकों द्वारा थोपे गए इस्लामी कानून के दंश को झेला है. विद्रोह का दौर और जनता की आशा के विपरीत चल रही सरकार औऱ ईराकी हमले के साथ-साथ पश्चिमी देशों के हस्तक्षेप का खेल, ईरान में चलता रहा है. कभी जिंदा रहने की घुटन तो कभी इस्लामी कानूनों के माध्यम से ही मानवाधिकारों के लिए संघर्ष का एक लंबा दौर देखा और विश्व के विभिन्न देशों के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का सम्मान पाते हुए एबादी को विश्व का सबसे सम्मानपूर्ण ...नोबेल शान्ति पुरस्कार... मिला. किताब की शुरुआत उन्नीस अगस्त १९५३ से हुई है जब लोकप्रिय मुसादेघ की जनवादी सरकार का तख्ता पलट कर शाह के समर्थकों ने राष्ट्रीय रेडियो नेटवर्क पर कब्जा जमा लिया. एबादी का कहना है कि इसके पीछे अमेरिका की तेल राजनीति का हाथ था. एबादी ने ध...

पाकिस्तान में खुफिया एजेंसी आई एस आई की समानान्तर सरकार चलती है- नवाज

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सत्येन्द्र प्रताप पाकिस्तान के अखबार दैनिक जंग के राजनीतिक संपादक सुहैल वड़ाएच ने.. गद्दार कौन - नवाज शरीफ की कहानी उनकी जुबानी.. पुस्तक में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके करीबियों के साक्षात्कारों को संकलित किया है. इस पुस्तक में नवाज शरीफ ,उनके छोटे भाई और पंजाब के मुख्यमंत्री रहे शहबाज शरीफ, नवाज की बेगम कुलसुम नवाज ,पुत्र हुसैन नवाज छोटे बेटे हसन नवाज, नवाज के करीबी सेनाधिकारी- सेना सचिव ब्रिगेडियर जावेद मलिक और दामाद कैप्टन सफदर के साछात्कार शामिल हैं. पुस्तक में बड़ी बेबाकी से पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति और विदेशी संबंधों में झांकने की कोशिश की गई है. साथ ही भारत से अलग होने और पाकिस्तान के निर्माण से लेकर आज तक, सत्ता और विदेशनीति में आई एस आई की भूमिका के बारे में पूर्व प्रधानमंत्री की राय जानने की कोशिश है. नवाज पर संपत्ति अर्जित करने और सत्ता के दुरुपयोग पर भी उनकी राय जानने की स्पस्ट कोशिश की गई है । ये साछात्कार उस समय लिए गए हैं जब नवाज, जद्दा और लंदन में निर्वासित जीवन बिता रहे थे. पुस्तक के पहले अध्याय में नवाज शरीफ द्वारा पाकिस्तान में परमाणु परीक्षण क...

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