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मामाजी माणिकचन्द्र वाजपेयी जन्मशताब्दी समारोह कार्यक्रम का समापन आज

भोपाल। विख्यात पत्रकार मामाजी माणिकचन्द्र वाजपेयी के जन्मशताब्दी वर्ष का समापन समारोह 07 अक्टूबर , बुधवार को शाम 4:00 बजे दिल्ली में आयोजित है। समारोह को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत और केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर संबोधित करेंगे। समारोह का सीधा प्रसारण विश्व संवाद केंद्र , मध्यप्रदेश के फेसबुक पेज और पांचजन्य के यूट्यूब चैनल पर किया जायेगा। समारोह का आयोजन इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र दिल्ली , पांचजन्य , विश्व संवाद केंद्र मध्यप्रदेश और स्वदेश (ग्वालियर , भोपाल , इंदौर) समूह की ओर से किया जा रहा है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और केंंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर करेंगे संबोधित उल्लेखनीय है कि हिन्दी पत्रकारिता के प्रमुख हस्ताक्षर माणिकचन्द्र वाजपेयी उपाख्य ‘ मामाजी ’ की जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में वर्षभर देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित हुए। सबसे पहला कार्यक्रम विश्व संवाद केंद्र मध्यप्रदेश की ओर से भोपाल में आयोजित किया गया। उसके बाद मामाजी माणिकचन्द्र वाजपेयी जन्मशती समारोह समिति के तत्वावधान में अनेक स्थानों पर व्याख्या...

ज्योति और सचिन: खलनायक नहीं, नायक हैं ये

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इष्ट देव सांकृत्यायन सचिन पायलट का प्रयास एक बार उलटा क्या पड़ा पूरे परिदृश्य पर वे खलनायक नजर आने लगे। गहलोत और दूसरे कांग्रेसियों से लेकर न्यूज चैनलों-अखबारों के छापदार विशेषज्ञों और सोशल मीडिया के छापेमार विशेषज्ञों तक ने उन्हें विभीषण से लेकर रावण और दुर्योधन से लेकर शकुनि तक साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ा। ठीक यही बात उस वक्त भी हुई थी जब पायलट के दहिनवार सिंधिया ने मध्य प्रदेश में तख्ता पलट किया था। सिंधिया अपने प्रयास में सफल हो गए तो अब उनके खिलाफ सारी आवाजें आनी बंद हो गईं। उस वक्त अमावस के नीरव अंधकार में दहाड़ते कांग्रेसी शेरों की हैसियत अब ज्योतिरादित्य के मामले में कीं कीं करते निरीह झींगुरों से अधिक नहीं रह गई है। अगर कहीं सिंधिया अगले चुनाव में जीत गए और भाजपा में अपने समर्थकों की संख्या बढ़ा सके तो इन झींगुरों में से आधों से ज्यादा का पिल्लों के रूप में पुनर्जन्म तो हम-आप दो साल बाद ही देख लेंगे। इसके लिए महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया को कोई बहुत ज्यादा कुछ करना नहीं है। उन्हें कुल जो करना है , वह बस इतना ही है कि महाराज के अपने साँचे से बाहर निकल आना है। ज्योतिरादित्...

रति का अध्यात्म: खजुराहो

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हरिशंकर राढ़ी कंदरिया महादेव मंदिर       छाया : हरिशंकर राढ़ी   यदि किसी को धरती पर कामक्रीडा का सौंदर्य ] वैचारिक खुलापन,   शारीरिक सुंदरता के प्रतिमान तथा कलात्मक जीवंतता एक साथ देखनी हो तो उसे खजुराहो की धरती पर एक बार जरूर आना चाहिए। ऐसे मंदिर शायद ही कहीं और हों जहां गर्भगृह में ईश्वरीय सत्ता के दूत ] हिंदू मान्यता के कल्याणकारी देव विराजमान हों और दीवारों पर सृश्टि की सुंदरतम रचना नारी के लावण्यमयी अंगों का पुरुष संसर्ग में अनावृत्त चित्रण हो। आज से लगभग एक हजार साल पहले प्रेम,   सौंदर्य और संभोग की पूजा करने वाला समाज हमारे इस तथाकथित विकसित समाज से कितना आगे और वैज्ञानिक सोच वाला था ] इसका अंदाज खजुराहो की धरती पर फैली विशाल मंदिर शृंखला को देखकर सहज ही हो जाता है। चरित्र,   वासना और गोपनीयता के नाम पर मनुष्य अपनी नैसर्गिकता और तार्किक सोच से कितना दूर हो गया है,   इसका अनुमान यहीं लगाया जा सकता है। ऐसा भी नहीं है कि आज भी खजुराहो जाने वाला हर भारतीय पर्यटक इन कामक्रीडारत मूर्तियों को देखकर बहुत सहज महसूस करता है या इसे एक...

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