बाज़ार
मुमताज़ अज़ीज़ ना ज़ाँ यहाँ हर चीज़ बिकती है कहो क्या क्या ख़रीदोगे यहाँ पर मंसब-ओ-मेराज की बिकती हैं ज़ंजीरें अना को काट देती हैं ग़ुरूर-ओ-ज़र की शमशीरें यहाँ बिकता है तख़्त-ओ-ताज बिकता है मुक़द्दर भी ये वो बाज़ार है बिक जाते हैं इस में सिकंदर भी यहाँ बिकती है ख़ामोशी भी , लफ़्फ़ाज़ी भी बिकती है ज़मीर-ए-बेनवा की हाँ अना साज़ी भी बिकती है दुकानें हैं सजी देखो यहाँ पर हिर्स-ओ-हसरत की हर इक शै मिलती है हर क़िस्म की , हर एक क़ीमत की यहाँ ऐज़ाज़ बिकता है , यहाँ हर राज़ बिकता है यहाँ पर हुस्न बिकता है , अदा-ओ-नाज़ बिकता है सुख़न बिकता है , बिक जाती है शायर की ज़रुरत भी यहाँ बिकती है फ़नकारी , यहाँ बिकती है शोहरत भी यहाँ पर ख़ून-ए-नाहक़ बिकता है , बिकती हैं लाशें भी यहाँ बिकती हैं तन मन पर पड़ी ताज़ा खराशें भी यहाँ नीलाम हो जाती है बेवाओं की मजबूरी यहाँ बीनाई बिकती है , यहाँ बिकती है माज़ूरी लहू बिकता है , बिकते हैं यहाँ अ ’ अज़ा-ए-इंसानी यहाँ बिकते हैं दो दो पैसों में जज़्बात-ए-निस्वानी मोहब्बत , जज्बा-ओ-हसरत ...