चुलबुली यादें
हम और बिरना खेलें एक संग मैया, पढ़ें इक संग, बिरना कलेवा मैया ख़ुशी -ख़ुशी दीनों, हमरा कलेवा मैया दीयो रिसियाए . मुझे याद है कन्या भ्रूण की सुरक्षा हेतु और बालक-बालिकाओं को सम।नता का दर्जा देने के लिए उन दिनों दूरदर्शन पर इक बड़ा ही प्यारा विज्ञापन आता था. जिसके जरिये पूरा संदेश भी था और वो इस क़दर मन में बसा जो हूबहू मुझे आज तक याद है. तब शायद चैनलों की बाढ़ नहीं आयी थी. तभी तो अश्लीता की गुंजाइशें भी नहीं होती थीं. खैर अब तमाम चैनलों के चलते दूरदर्शन का एंटीना कहीं कुचल गया. क्योंकि इसको लगा डाला तो लाइफ झींगालाला. इतने चैनलों को देखने के लिए बस बटन दबाते रहो, कुछ दिखे तो वहीं रोक दो वरना आगे बढ जाओ. खैर इसमें बढने की कोई कोशिश नहीं करनी होती क्योंकि इसमें एक के साथ एक फ्री जो मिल जाता है. हम वापस पुराने विज्ञापनों की बात करें तो एक और याद आ रहा है हॉकिंस की सीटी बजी खुशबू ही खुशबू उड़ी......... उस वकत सौम्यता का जामा पहने ऐसे न जाने कितने विज्ञापन होंगे. आपको शायद याद हो एक छोटी सी डाँक्युमेंटरी फिल्म आती थी बच्चों के लिए प्रायोजित कार्यक्रम था " सूरज एक चन्दा एक, एक-एक करके तारे...