शास्त्री जी और उनका 'आवश्यक' आनंद
पिछले दिनों भाई मसिजीवी ने अपने चिट्ठे पर एक पोस्ट किया था. शास्त्री जे सी फिलिप के चिट्ठे सारथी के बारे में उन्होने कुछ अंदेशे जताए थे. जाने क्यों उन्हें लगा कि यह मामला कुछ अतिमानवीय टाईप का हो रहा है। उसमें उन्होने शास्त्री जी के बारे में संक्षेप में पर्याप्त जानकारी दीं है और साथ ही यह सवाल भी उठाया है- 100000 से ज्यादा वितरित प्रतियों वाली ईपुस्तक के लेखक शास्त्रीजी पुरातत्व पर डाक्टरल शोध करते हुए हर चिटृठा पढ़ लेते हैं- इतने ट्रेफिक को मैनेज कर लेते हैं- हरेक को उत्तर दे देते हैं- इतने सारे टूलोंकी समीक्षा कर पाते हैं- अमरीकी विश्वविद्यालय के मानद कुलपति के दायित्व निवाह ले जाते हैं- अपने अराध्य के प्रति उपासना दायित्व पूरे कर लेते हैं- अन्य अनुशासनो के प्रति अपने अकादमिक दायित्व भी पूरे कर लेते हैं....कुछ कुछ दैवीय हो रहा है बंधु। हमारा शक है कि सारथी कोई निजी चिटृठा नहीं है। शास्त्री जी से इसके पहले तक मेरा परिचय बस चिट्ठेबाजी तक सीमित था. चिट्ठेबाजी के दौरान शुरुआत में मुझे मुश्किलें बहुत झेलनी पडती थीं. शास्त्री जी के सारथी पर चूंकि मैंने कई बार तकनीकी लेख भी ...