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शहीद की वसीयत बनाम ज्ञान की बाढ़

वीरगति प्राप्त करने वाले सैनिकों के मरणोपरांत दी जाने वाली राशि का क्या किया जाए, इस पर अपना अत्यंत बहुमूल्य ज्ञान देने से पहले जरूरी है कि उस सैनिक की मनःस्थिति के बारे में भी एक बार जान लिया जाए। यह बात भी ध्यान रखी जाए कि वह सैनिक की अपनी कमाई हुई राशि होती है, वरासत में मिली हुई नहीं। वह कमाई हुई राशि भी कोई मामूली नहीं होती है। उस राशि के बदले में उसने अपना केवल श्रम और कौशल या अपनी विशेषज्ञता नहीं दी होती, यथार्थतः अपनी जान दी होती है। कई बार तो ऐसी जगह जहाँ शरीर के चीथड़े उड़ गए होते हैं और वो चीथड़े भी बटोर कर लाए नहीं जा पाते। मुद्दे पर अपना ज्ञान देने और निरर्थक बहस का मुद्दा बनाने से पहले एक बार सोच लिया करें कि जिनके मन के कोने-कोने में एक रिश्ते के रूप में उस अस्तित्व की स्मृतियाँ समाई होती हैं, जिनके लिए वह एक राजनैतिक या सामाजिक या विधिक मुद्दा भर नहीं होता, उन पर आपके इस महान योगदान से क्या प्रभाव पड़ेगा। जिस तरह किसी सिविलियन का अपनी कमाई हुई राशि पर पूरा अधिकार होता है, वैसे ही सैनिक का भी अपनी कमाई हुई राशि पर पूरा अधिकार होता है। यह ऐसे ही नहीं होता, सेना की दो दशकों से...

बिना लाइन की पटरी

धड़ड़...धड़ड़..धड़ड़ धड़ड़...धड़ड़..धड़ड़ ...धड़ड़..धड़ड़ पटरियों पर लोकर ट्रेन दोनों तरफ से सांप की तरह बल खाती हुई निकल रही थी। सोम, रोहन और नाथू गुमटी के पास उतर कर पटरियों के किनारे-किनारे एक ओर अंधेरे में बढ़ रहे थे। रेल्वे की बांड्री के दूसरी तरफ खड़ा एक सात मंजिला बिल्डिंग की खिड़कियों से निकलने वाली रोशनी अंधरे को धीरे-धीरे चाट रहा था। बांड्री के इस ओर कतारबद्ध तरीके से इंटों के छोटी-छोटी कोठरियां बनी हुई थी, जिनमें खिड़कियां नहीं थी। पटरियां बैठाने वाले मजदूरों के परिवार इन्हीं कोठरियों में टिके हुये हुये थे। अंधेरे में आगे बढ़ते हुये सोम का पैर एक बड़े से पत्थर से टकराया और इसके साथ ही उसके हाथ में पड़े पोलीथीन के बैग से आपस में बोतलों के खनखनाने की आवाज अंधेरे में तेजी से फैल कर गुम हो गई। अबे देख के....केएलपीडी करेगा क्या..., अंधेरे में संभलते हुये सोम की ओर घूरते हुये नाथू गुर्राया। चिंता मत कर....मेरे नाक मुंह टूट जाये, लेकिन ये बोतल नहीं टूटेंगे...पोलीथीन के बैग में हाथ डालकर बोतलों को टटोलते हुये सोम ने तसल्ली दी। कुछ चखना ले लेना चाहिये था....आगे बढ़ते हुये नाथू ...

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