Darshan, Drushti Aur Paaon

दर्शन, दृष्टि और पाँव   (यात्रा संस्मरण)

दर्शन, दृष्टि और पाँव का मुखपृष्ठ 
आज मेरे यात्रा संस्मरण ‘दर्शन, दृष्टि और पाँव’ की लेखकीय प्रतियाँ प्राप्त हुईं। वैसे तो यह पुस्तक अगस्त 2019 में ही प्रकाशित होकर आ गई थी किंतु तब कुछ ही प्रतियाँ मिली थीं। इस संस्मरण को विमोचन का सौभाग्य साहित्य मनीषी प्रो0 रामदरश मिश्र के हाथों उनके जन्मदिन के अवसर पर मिला था। प्रो0 मिश्र जी के जन्मदिन पर वरिष्ठ कवि-आलोचक ओम निश्चल, नरेश शांडिल्य, अलका सिन्हा, डाॅ0 वेदमित्र शुक्ल, उपेन्द्र कुमार मिश्र एवं अन्य ख्यातिलब्ध साहित्यकार उपस्थित थे जिन्होंने इसके विमोचन को मेरे लिए गौरवपूर्ण बनाया। इसके बाद किन्ही कारणों से शेष प्रतियाँ आने में विलंब हो गया।
इस संस्मरण में कुल दस ज्योतिर्लिंगों की यात्रा के साथ कन्याकुमारी, द्वारिका पुरी, मदुराई, सिक्किम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अजंता-एलोरा, पचमढ़ी, खजुराहो जैसे अनेक स्थानों का संस्मरण संकलित है। लगभग 240 पृष्ठों की इस पुस्तक को मनीष पब्लिकेशंस नई दिल्ली ने बहुत रुचिपूर्वक प्रकाशित किया है।
आज शेष लेखकीय प्रतियाँ मिलीं तो सोचा कि क्यों न इसका एक और विमोचन श्रीमती जी के हाथों करवा लूँ। आखिर इसको अस्तित्व में लाने के लिए उन्हीं के हिस्से का तो समय चुराया है। मेरे जैसे लेखक को झेलते हुए मेरी जिम्मेदारी उठाना उन्हीं के वश का है। वैसे भी जीवनयात्रा के अतिरिक्त इन तमाम यात्राओं में वे सहयात्री रही हैं।


 




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