सच-सच बताना किस किस ने मनाई आज हिंदी की बरसी...?
बरसी नहीं तो और क्या....जो भाषा मेरी मां की भाषा है, जिस भाषा में मैंने पहला बोल बोला, जिसमें मैंने मां कहना सीखा, जिसमें मैंने पिता जी कहना सीखा, जिसकी गोद में बड़ा हुआ, जिस बोल से मैंने अपने भाई बहनों से लड़ना-झगड़ना-प्यार करना सीखा, जिस भाषा में मेरी मां ने मुझे डांटा, दुलार किया, जिस भाषा में मैंने जीना सीखा आज अगर उसके लिए उसका दिवस मानना पड़े तो उसे बरसी नहीं तो और क्या कहूं........
.इसीलिए मैंने कहा बरसी........जो भाषा मेरी रग- रग में बसी है, जिसके संग मैंने जीना सीखा उसके लिए उसी के देश में एक दिवस क्यूँ.......दिवस या तो जनम दिन पर होता हे या फिर मरण दिवस........क्या आपको नहीं लगता की हिंदी दिवस मना कर हम यह कह रहें हैं . ..'हे..! हिंदी अब तुम केवल दिवस मनाने भर की भाषा रह गयी हो..' आखिर हिंदी के लिए दिवस मनाने की जरुरत ही क्या है.......वो तो हम सबकी हर पल हर रोज की भाषा है....
ReplyDeleteसच है, इसे तो बरसी ही कहेंगे। हमें तो सोते जागते भाती है हिन्दी।
ReplyDeleteठीक कह रहे हैं.
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पढि़ए और बदलिए नजरिया, हिन्दी ही तो अंग्रेजी को भगाने का जरिया।
एकदम सत्य कहा आपने......
ReplyDeleteहिन्दी दिवस सुनकर मेरा मन भी बुरी तरह आक्रोशित हो उठता है....
आज यह स्थिति हो गयी है हमारी...
धिक्कार है !!!!