कलियां भी आने दो

रतन

कांटे हैं दामन में मेरे
कुछ कलियां भी आने दो
मुझसे ऐसी रंजिश क्यों है
रंगरलियां भी आने दो

सूखे पेड़ मुझे क्यों देते
जिनसे कोई आस नहीं
कम दो पर हरियाला पत्ता
और डलियां भी आने दो

तेरी खातिर भटका हूं मैं
अब तक संगी राहों पर
जीवन के कुछ ही पल तुम
अपनी गलियां भी आने दो

Comments

  1. jnaab bhut achchi prstuti. bdhaayi ho. akhtar khan akela kota rajsthan

    ReplyDelete
  2. एक एक कर कर,
    उम्मीदें टूट है जाती,
    बची हुई भी जाने दो अब,
    और सुकूँ को आने दो ..

    अच्छी प्रस्तुति ...

    ReplyDelete
  3. अच्छी प्रस्तुति। आभार।

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर, आपका अधिकार है।

    ReplyDelete
  5. वाह....बहुत ही सुन्दर भावाभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  6. शानदार
    अनुपम कविता !

    ReplyDelete

Post a Comment

सुस्वागतम!!

Popular posts from this blog

रामेश्वरम में

इति सिद्धम

पेड न्यूज क्या है?

Most Read Posts

रामेश्वरम में

Bhairo Baba :Azamgarh ke

Maihar Yatra

Azamgarh : History, Culture and People

...ये भी कोई तरीका है!

इति सिद्धम

सीन बाई सीन देखिये फिल्म राब्स ..बिना पर्दे का

आइए, हम हिंदीजन तमिल सीखें

विदेशी विद्वानों के संस्कृत प्रेम की गहन पड़ताल

पेड न्यूज क्या है?