सच-सच बताना किस किस ने मनाई आज हिंदी की बरसी...?

बरसी नहीं तो और क्या....जो भाषा मेरी मां की भाषा है, जिस भाषा में मैंने पहला बोल बोला, जिसमें मैंने मां कहना सीखा, जिसमें मैंने पिता जी कहना सीखा, जिसकी गोद में बड़ा हुआ, जिस बोल से मैंने अपने भाई बहनों से लड़ना-झगड़ना-प्यार करना सीखा, जिस भाषा में मेरी मां ने मुझे डांटा, दुलार किया, जिस भाषा में मैंने जीना सीखा आज अगर उसके लिए उसका दिवस मानना पड़े तो उसे बरसी नहीं तो और क्या कहूं........

Comments

  1. आपका पोस्ट सराहनीय है. हिंदी दिवस की बधाई

    ReplyDelete
  2. .इसीलिए मैंने कहा बरसी........जो भाषा मेरी रग- रग में बसी है, जिसके संग मैंने जीना सीखा उसके लिए उसी के देश में एक दिवस क्यूँ.......दिवस या तो जनम दिन पर होता हे या फिर मरण दिवस........क्या आपको नहीं लगता की हिंदी दिवस मना कर हम यह कह रहें हैं . ..'हे..! हिंदी अब तुम केवल दिवस मनाने भर की भाषा रह गयी हो..' आखिर हिंदी के लिए दिवस मनाने की जरुरत ही क्या है.......वो तो हम सबकी हर पल हर रोज की भाषा है....

    ReplyDelete
  3. सच है, इसे तो बरसी ही कहेंगे। हमें तो सोते जागते भाती है हिन्दी।

    ReplyDelete
  4. http://avinashvachaspati.blogspot.com/2010/09/blog-post_6399.html
    http://avinashvachaspati.blogspot.com/2010/09/blog-post_14.html
    http://avinashvachaspati.blogspot.com/2010/09/blog-post_13.html
    पढि़ए और बदलिए नजरिया, हिन्‍दी ही तो अंग्रेजी को भगाने का जरिया।

    ReplyDelete
  5. एकदम सत्य कहा आपने......
    हिन्दी दिवस सुनकर मेरा मन भी बुरी तरह आक्रोशित हो उठता है....
    आज यह स्थिति हो गयी है हमारी...
    धिक्कार है !!!!

    ReplyDelete

Post a Comment

सुस्वागतम!!

Popular posts from this blog

रामेश्वरम में

...ये भी कोई तरीका है!

आइए, हम हिंदीजन तमिल सीखें

Most Read Posts

Bhairo Baba :Azamgarh ke

Maihar Yatra

रामेश्वरम में

Azamgarh : History, Culture and People

सीन बाई सीन देखिये फिल्म राब्स ..बिना पर्दे का

आइए, हम हिंदीजन तमिल सीखें

...ये भी कोई तरीका है!

ये क्या क्रिकेट-क्रिकेट लगा रखा है?

गन्ने के खेत में रजाई लेकर जाती पारो

विदेशी विद्वानों का संस्कृत प्रेम ( समीक्षा)