थिंकर की बीवी

क्या सभ्यता के विकास की कहानी हथियारों के विकास की कहानी है ? इनसान ने पहले पत्थरों को जानवरों के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया,फिर लोहे को और अब आणविक शक्तियों से लैस है,यह क्या है? हथियारों के विकास की ही तो कहानी है !!! पृथ्वी पर से अपने वजूद को मिटाने के लिए इनसान वर्षो् से लगा हुआ है। थिंकर की आंखे दीवार पर टीकी थी, लेकिन उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। दीमाग में एक साथ कई बातें घूम रही थी।
गैस बंद कर देना, दूध चढ़ा हुआ है,बाथरूम से पत्नी की आवाज सुनाई दी। गैस चूल्हे की तरफ नजर पड़ते ही उसके होश उड़ गये। सारा दूध उबल कर चूल्हे के ऊपर गिर रहा था। सहज खतरे को देखते हुये उसने जल्दी से चूल्हा बुताया और गिरे हुये दूध को साफ एक कपड़े से साफ करने लगा। लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया और बीवी उसके सिर पर आकर खड़ी हो गई।
तुम्हारी सोचने की यह बीमारी किसी दिन घर को ले डूबेगी। तुम्हारे सामने दूध उबल कर गिरता रहा और तूम्हे पता भी नहीं चला...हे भगवान मेरी किस्मत में तुम्ही लिखे थे। घर में दो छोटे-छोटे बच्चे हैं..अब खड़ा खड़ा मेरा मूंह क्या देख रहे हो। जाओ, जाकर दूध ले आओ।
बीवी की फटकार सुनने के बाद वह कपड़े पहनकर दूध लाने निकल पड़ा।
यदि इनसान को बचाना है तो हथियारों को नष्ट करना होगा, लेकिन कैसे? हथियारों को बनाने के उद्देश्य क्या है,इसकी जरूरत क्या है ? कौन लोग हथियार बनाने के धंधे में लगे हुए हैं? वह सोंचते हुये सड़क पर चला जा रहा था। दूध के बूथ पर पहुंचा और पैसा दुकानदार की ओर बढ़ा कर बोला,एक पैकेट दूध देना।
इनसान को हथियारों से मुक्त करना जरूरी है। लेकिन यह कुछ लोगों के लिए मुनाफे का धंधा है। वे लोग कभी इस धंधे को बंद करना नहीं चाहेंगे। वे लोग एसा सोचते भी नहीं होंगे। हथियार उत्पान दुनिया की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। घर में प्रवेश करने के बाद अपनी मेज पर रखी हुई तोलोस्तोव की पुस्तक युद्ध और शांति के पन्ने पलटने लगा। एक अंडरलाइन किये हुये वाक्य पर उसकी नजरे जाकर टिक गई, इनसान के नसों से खून निकाल कर पानी भर दो फिर युद्ध नहीं होंगे।
दूध कहां है, ड्रेसिंग टेबल छुटकारा मिलते ही बीवी ने पूछा।
दूध !! उसे समझ में नहीं आया कि बीवी उससे क्या पूछ रही है।
अरे उल्लू की तरह इधर उधर क्या देख रहे हो...तुम्हें दूध लाने भेजा था...
वो तो मैं ले आया..किचन में देखो..
कुछ देर तक किचन में दूध खोजने के बाद वह दनदनाती हुई फिर आई, किचन में दूध नहीं है.
.लेकिन मैंने दुकानदार को पैसे तो दिये थे
और दूध नहीं लाये..हे भगवान कैसे आदमी से पाला पड़ा है..दुकानदार को पैसे दे आया और दूध नहीं लाया...यह सब तुम्हारे सोंचते रहने की वजह से होता है...लेकिन...अब यहां खड़े-खड़े मेरा मुंह क्या देख रहे हो...जाकर दूध लाओ...

Comments

  1. धन्यवाद दो थिंकर बीवी को की सिर्फ़ डांट कर छोड़ दिया. वरना काम तो यह लतियाने लायक था!

    ReplyDelete
  2. mujhe bhi yahi lagata hai....aapase sau pratish sahmat hun...

    ReplyDelete
  3. आपने बिल्कुल सही लिखा है की सोचते समय मनुष्य बाकि बातो को भूल जाता है

    वैसे आपकी कहानी और उसका विषय मुझे बहुत ही अच्छा लगा

    आज कल के व्यस्त जीवन में अक्सर ये हो जाया करता है

    ReplyDelete
  4. वाह क्या बात है, अकसर ऎसा सभी के साथ होता होगा, कई बार हाथ मे चीज होती है ओर हम उसे चारो ओर ढुढते है.
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  5. jee haan hathiyaar honge to unhe chalaane ki khujlaahat hogi hi!

    ReplyDelete

Post a comment

सुस्वागतम!!

Popular posts from this blog

गढ़ तो चित्तौडग़ढ़...

Bhairo Baba :Azamgarh ke

Azamgarh : History, Culture and People

Most Read Posts

Bhairo Baba :Azamgarh ke

Maihar Yatra

Azamgarh : History, Culture and People

सीन बाई सीन देखिये फिल्म राब्स ..बिना पर्दे का

रामेश्वरम में

ये क्या क्रिकेट-क्रिकेट लगा रखा है?

गन्ने के खेत में रजाई लेकर जाती पारो

गढ़ तो चित्तौडग़ढ़...

चित्रकूट की ओर

चित्रकूट में शेष दिन